कृषि एवं कानून डेस्क:
भारत में विविध प्रकार की फसलों की खेती की जाती है, लेकिन अफीम (Opium) एक ऐसी अनूठी और संवेदनशील फसल है जिसका उपयोग मुख्य रूप से औषधीय और जीवनरक्षक दवाइयां बनाने में होता है। यही वजह है कि देश में अफीम की खेती पर सरकार का कड़ा नियंत्रण रहता है। बिना लाइसेंस और सरकारी अनुमति के इसकी खेती करना सख्त कानूनन अपराध है।
किस राज्य में होती है सबसे ज्यादा अफीम की खेती?
भारत में मध्य प्रदेश अफीम का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।
प्रमुख जिले: मध्य प्रदेश के मंदसौर, नीमच और रतलाम जिले अफीम की खेती के लिए देशभर में मशहूर हैं। यहाँ के किसान वर्षों से नियमों के तहत लाइसेंस लेकर इसकी खेती कर रहे हैं।
अन्य राज्य: मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ सीमित और तय जिलों में भी केंद्रीय वित्त मंत्रालय के नारकोटिक्स विभाग की निगरानी में अफीम उगाने का लाइसेंस दिया जाता है।
कैसे होती है अफीम की खेती? (प्रोसेस)
अफीम की खेती एक बहुत ही बारीकी और सावधानी से किया जाने वाला काम है:
सर्दियों का मौसम: इसकी बुवाई और फसल की देखरेख मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में की जाती है।
चीरा लगाने की विधि: जब पौधा तैयार हो जाता है और उस पर डोडे (फल) आते हैं, तब शाम के समय उन पर हल्का सा चीरा लगाया जाता है।
दूध से अफीम बनने की प्रक्रिया: चीरा लगाने के बाद फल से सफेद रंग का गाढ़ा दूध जैसा पदार्थ निकलता है। रातभर में सूखने के बाद यह भूरे-काले रंग का हो जाता है, जिसे सुबह एकत्र कर लिया जाता है।
सरकारी खरीद: तैयार की गई पूरी अफीम को सरकार तय मापदंडों और तय दरों के अनुसार खुद खरीदती है।
किसानों को कितना होता है मुनाफा?
अफीम की खेती पारंपरिक फसलों (जैसे गेहूं, चना या सरसों) की तुलना में किसानों को बेहतर आर्थिक रिटर्न देती है। हालाँकि, इसका मुनाफा कई कारकों पर निर्भर करता है:
किसान को कितने क्षेत्रफल (आरी) के लिए लाइसेंस मिला है।
अफीम में मॉर्फिन (Morphine) की मात्रा और कुल उत्पादन कितना हुआ है।
सरकार द्वारा उस वर्ष तय की गई खरीद दर (Grade Price) क्या है।
यदि फसल की गुणवत्ता अच्छी हो और उत्पादन सरकार के तय मानकों से अधिक या उसके अनुरूप हो, तो किसानों को काफी सम्मानजनक और आकर्षक मुनाफा मिलता है।
अफीम की खेती से जुड़े महत्वपूर्ण नियम
लाइसेंस अनिवार्य: नारकोटिक्स विभाग से लिखित लाइसेंस और तय क्षेत्रफल के बिना एक भी पौधा उगाना एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत गंभीर अपराध है।
कड़ी निगरानी: बोए गए रकबे से लेकर पैदावार के एक-एक ग्राम का हिसाब सरकार के पास होता है।
सलाह: यदि कोई किसान इसकी खेती में रुचि रखता है, तो उसे सबसे पहले केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (CBN) के दिशा-निर्देशों और पात्रता की पूरी जानकारी लेनी चाहिए।





