कोलकाता:

कोलकाता के बिड़ला तारामंडल के समक्ष आयोजित तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरकर लोकतांत्रिक आंदोलन करने का आह्वान किया और कानूनी लड़ाई को देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय अदालत तक ले जाने का संकेत दिया।

ममता बनर्जी के भाषण के प्रमुख बिंदु

  • "14 हजार केस दर्ज किए, जरूरत पड़ी तो जाऊंगी इंटरनेशनल कोर्ट": ममता बनर्जी ने केंद्र द्वारा टीएमसी नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों का जिक्र करते हुए कहा, "आपने 14 हजार केस दर्ज किए हैं? हमारे सांसद कल्याण बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहे हैं, मैं भी जाऊंगी। जरूरत पड़ी तो इस लड़ाई को इंटरनेशनल कोर्ट तक ले जाऊंगी। याद रखना, सरकार भी एक्सपोज होगी और गिरफ्तारियां करने वाले भी एक्सपोज होंगे।"
  • छात्रों को जेल जाने का आह्वान: ममता बनर्जी ने छात्रों और युवाओं में नया जोश भरते हुए कहा कि उन्हें अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना होगा। उन्होंने कहा, "ज़रूरत पड़े तो जेल जाएं। एक महीने तक जेल का खाना खा लें, लेकिन कभी बीजेपी का खाना न खाएं।"
  • पुलिस परमिशन और प्रशासनिक बंदिशों पर सवाल: कोर्ट से रैलियों की अनुमति लेने की बाध्यता पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि बार-बार अदालत जाकर समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "अब से अगर पुलिस रैलियों की परमिशन नहीं देती है, तो मैं सीधे जनता से अनुमति लेकर सड़कों पर उतरूंगी।"
  • ट्रैफिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर निशाना: उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने विपक्षी नेताओं की रैलियों के लिए कई मुख्य मार्ग बंद कर दिए, जिससे आम जनता को असुविधा हुई। हालांकि, उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से एम्बुलेंस को रास्ता देने और पुलिस के साथ सहयोग करने की अपील की।

राजनीतिक मायने

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस भाषण से साफ है कि आगामी दिनों में टीएमसी और भाजपा के बीच सड़क से लेकर कोर्ट तक का राजनीतिक संघर्ष और अधिक तेज होने वाला है। जिलों के दौरे का ऐलान कर ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावी समर के लिए जमीनी स्तर पर लामबंद होने का कड़ा संदेश दे दिया है।