नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय और उनकी संसद सदस्यता रद्द करने से जुड़ा विवाद अब देश की शीर्ष अदालत पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी 20 बागी सांसदों और लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

संवैधानिक पदों पर बैठे लोग समय पर लें निर्णय: सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान पीठ के सदस्य जस्टिस जोयमाल्या बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं और पदों पर बैठे अधिकारियों को अपने फैसले तय समय सीमा के भीतर लेने चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल के अनुरोध पर स्पीकर को नोटिस नहीं

मामले की सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि स्पीकर ने पहले ही 20 सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और प्रक्रिया शुरू कर दी है। सॉलिसिटर जनरल के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक नोटिस जारी न करते हुए तुषार मेहता को स्पीकर से निर्देश प्राप्त कर कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया।

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा मामला जून 2026 में तब शुरू हुआ जब काकोली घोष, सुदीप बंधोपाध्याय, शताब्दी रॉय और यूसुफ पठान समेत TMC के 20 सांसदों ने दावा किया कि उन्होंने NCPI में अपनी पार्टी का विलय कर लिया है।

  • बागी सांसदों का तर्क: 20 सांसद TMC के कुल 28 लोकसभा सांसदों का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा हैं। संविधान की 10वीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) का पैरा 4 दो-तिहाई सदस्यों के विलय को अयोग्यता से संरक्षण प्रदान करता है।
  • TMC का रुख: पार्टी का कहना है कि महज सांसदों के समूह का अलग हो जाना मूल राजनीतिक दल का वैध विलय नहीं माना जा सकता। TMC ने 19 जून को ही इन सभी के खिलाफ स्पीकर के समक्ष अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं।

अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को 26 जुलाई तक सभी औपचारिक पत्र सौंपने और कई बार मुलाकात करने के बावजूद दो महीने बीत जाने पर भी कोई संतोषजनक फैसला नहीं लिया गया है। इसी देरी के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।