विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त 2026 में भारतीय शेयर बाजार में ₹30,919 करोड़ का शुद्ध निवेश किया है। जुलाई के ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद यह लगातार दूसरा महीना है जब FPIs भारतीय शेयरों के शुद्ध खरीदार रहे हैं। यह सुधार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले मार्च से जून 2026 के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी निकासी की थी (अकेले मार्च में करीब ₹1.17 लाख करोड़ निकाले थे)।

FPIs की वापसी के 5 प्रमुख कारण

  1. रुपये की मजबूती और स्थिरता: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय रुपये में आई स्थिरता ने विदेशी निवेशकों के जोखिम को कम किया है।
  2. कंपनियों के नतीजों (Q1) में सुधार: जून तिमाही के नतीजों में भारतीय कंपनियों का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा, जिससे अर्थव्यवस्था में बड़ी गिरावट की आशंका दूर हुई।
  3. वैश्विक पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग: वैश्विक निवेशक AI और सेमीकंडक्टर से जुड़े ओवरवैल्यूड टेक शेयरों से मुनाफा निकालकर भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) की ओर रुख कर रहे हैं।
  4. अमेरिकी फेड दर कटौती की उम्मीद: US फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना से उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ा है।
  5. भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती: भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद दीर्घकालिक निवेशकों को आकर्षित कर रही है।

FPI निवेश का ऐतिहासिक तुलनात्मक रुझान (2025–2026)

वर्ष 2026 में FPI की हालिया वापसी के बावजूद, YTD (साल-दर-तारीख) के आंकड़े दिखाते हैं कि FPIs का कुल नेट आउटफ्लो अभी भी उच्च स्तर पर है:

समयावधि (Period)FPI शुद्ध निवेश / निकासी (Net FPI Flow)मुख्य बाजार कारक (Key Market Drivers)
पूरा वर्ष 2025-₹1.66 लाख करोड़ (निकासी)ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव।
मार्च - जून 2026-₹2.23 लाख करोड़ (निकासी)टेक/AI सेक्टर में भारी बिकवाली और वैश्विक मंदी की आशंका।
जुलाई 2026+₹20,200 करोड़ (निवेश)कॉर्पोरेट अर्निंग्स में सुधार और वैल्युएशन में सुधार।
अगस्त 2026+₹30,919 करोड़ (निवेश)रुपये में स्थिरता, US Fed रेट कट की उम्मीद व टेक से रोटेशन।

भविष्य के जोखिम और मुख्य बिंदु

  • वैश्विक चुनौतियाँ: मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका में ऊंची बॉन्ड यील्ड बाजार पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
  • व्यापारिक तनाव: अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।
  • आगामी ट्रिगर: आगामी US फेड बैठक के फैसले, भारत की आगामी GDP ग्रोथ और महंगाई (Inflation) के आंकड़े यह तय करेंगे कि FPIs की यह खरीदारी आगे भी जारी रहेगी या नहीं।