नई दिल्ली: फरवरी में ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बनाने के लिए अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया है। इस योजना के तहत ईरान की आय के सभी स्रोतों और व्यापारिक मार्गों को बंद करने की तैयारी की जा रही है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, वाशिंगटन अगले सप्ताह ऐसे नए और सख्त प्रतिबंधों की घोषणा करेगा जो दुनिया ने पहले कभी नहीं देखे होंगे। इस बाबत अमेरिकी प्रशासन एक बेहद महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी आगामी रूपरेखा स्पष्ट करेगा।
ईरान को घेरने की बहुस्तरीय रणनीति
- चीन की स्वतंत्र 'टीपॉट' रिफाइनरियों पर नजर:
- ईरान के 80% से अधिक तेल का खरीदार चीन है, जहां की छोटी व स्वतंत्र रिफाइनरियां ('टीपॉट') इस व्यापार में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
- इन रिफाइनरियों का अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से सीधा संबंध न होने के बावजूद, अमेरिका अब इन पर नकेल कसने की योजना बना रहा है।
- चीनी बैंकों को सीधी चेतावनी:
- अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (OFAC) ने चीन के दो सबसे बड़े बैंकों को कड़ा संदेश दिया है।
- यदि इन बैंकों के माध्यम से ईरानी तेल या फंड का लेनदेन पाया गया, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग तंत्र से ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
- शैल कंपनियों और डिजिटल परिसंपत्तियों पर प्रहार:
- अमेरिका अब तक 1,000 से अधिक व्यक्तियों, जहाजों और विमानों को प्रतिबंधित कर चुका है।
- इसके अलावा, ईरान से जुड़ी लगभग $500 मिलियन (50 करोड़ डॉलर) की क्रिप्टोकरेंसी भी फ्रीज की जा चुकी है।
- जमीनी सीमाओं और व्यापारिक रास्तों की नाकेबंदी:
- होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री नाकेबंदी के बाद अब पड़ोसी देशों (जैसे तुर्की और पाकिस्तान) पर कूटनीतिक दबाव बनाकर जमीनी व्यापारिक रास्तों को भी पूरी तरह सील करने का प्रस्ताव है।
- सीनेट में पेश नए नियमों के जरिए ईरान के साथ व्यापार करने वाले तीसरे देशों पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रावधान भी शामिल किया जा रहा है।





