नई दिल्ली: देश में कृषि सेवाओं को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। संसद में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर द्वारा दिए गए एक लिखित जवाब के अनुसार, 3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी (Farmer ID) जारी की जा चुकी हैं।
एग्रीस्टैक को एक 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' के रूप में विकसित किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों तक सरकारी योजनाओं और कृषि सुविधाओं की पहुंच को सुगम, त्वरित और पारदर्शी बनाना है।
क्या है एग्रीस्टैक और इसके तीन मुख्य स्तंभ?
एग्रीस्टैक के अंतर्गत प्रत्येक किसान की एक व्यापक डिजिटल प्रोफाइल तैयार की जाती है। इसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी, भूमि रिकॉर्ड, बोई जाने वाली फसलें तथा पशुधन व मत्स्य पालन जैसी संपत्तियों का विवरण शामिल रहता है।
इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन मूलभूत डिजिटल रजिस्टर तैयार किए जा रहे हैं:
- किसान रजिस्टर: कृषि सेवाओं के लिए एक एकीकृत आधारभूत डेटाबेस।
- भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र (Geo-referenced Village Maps): सटीक भूमि चिन्हांकन के लिए।
- बोई गई फसल का रजिस्टर: फसलों का वास्तविक समय पर विवरण।
इन रजिस्टरों के माध्यम से कृषि ऋण, फसल बीमा, मौसम परामर्श और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल खरीद जैसी सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
भूमि रिकॉर्ड से जुड़ाव और डिजिटल फसल सर्वेक्षण
किसान आईडी का निर्माण किसानों की जानकारी को उनके डिजिटल भू-अभिलेखों के साथ जोड़कर किया जा रहा है। इसी कड़ी में रबी 2025-26 के दौरान देश के 648 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण (DCS) पूरा किया गया, जिसमें 31.3 करोड़ से अधिक भूखंडों (Plates/Lands) को कवर किया गया है। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर ने भी इस सर्वेक्षण और किसान आईडी निर्माण की प्रक्रिया में भाग लेना शुरू कर दिया है।
डेटा सुरक्षा और राज्यों का स्वामित्व
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि एग्रीस्टैक का निर्माण देश के संघीय ढांचे को ध्यान में रखते हुए किया गया है:
- डेटा का स्वामित्व: किसान डेटा का पूर्ण स्वामित्व संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास रहेगा।
- सहमति आधारित मॉडल: डेटा संग्रह और इसे अधिकृत संस्थाओं के साथ साझा करने की प्रक्रिया पूरी तरह से किसान की सहमति पर निर्भर होगी।
- सुरक्षा मानक: डेटा की सुरक्षा 'डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023' और 'डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025' के तहत की जा रही है। MeitY और CERT-In के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी जानकारियां एन्क्रिप्टेड (Encrypted) रूप में सुरक्षित रहेंगी।
AI और मशीन लर्निंग से होगा फसल उपज का सटीक आकलन
कृषि क्षेत्र में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी उन्नत तकनीकों का भी समावेश किया जा रहा है:
- YES-TECH पहल: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों की उपज का सटीक आकलन करने के लिए AI और मशीन लर्निंग का उपयोग किया जा रहा है।
- DGCES प्रणाली: समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध कराने के लिए 'डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सिस्टम' (DGCES) विकसित किया गया है।
डिजिटल पहचान से लेकर AI आधारित आकलन तक, एग्रीस्टैक भारत के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह से आधुनिक और किसान-केंद्रित बनाने की ओर एक बड़ा कदम साबित हो रहा है।





