टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के इतिहास में पहली बार एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। मंगलवार को बॉम्बे हाउस में आयोजित होने वाली कंपनी की सालाना आम बैठक (AGM) को कोरम (बैठक के लिए आवश्यक न्यूनतम सदस्यों की संख्या) पूरा न होने के कारण अचानक स्थगित करना पड़ा। बैठक में कुछ शेयरधारक व्यक्तिगत तो कुछ ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे, लेकिन आवश्यक कोरम के अभाव में कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।

चैरिटी कमिश्नर की रोक बनी मुख्य वजह

इस स्थगन के पीछे मुख्य कारण टाटा संस के दो प्रमुख कंट्रोलिंग ट्रस्टों में से एक—सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT)—पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर द्वारा लगाई गई रोक है। चैरिटी कमिश्नर ने महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट की धारा 36A(1) के तहत यह रोक SRTT बोर्ड के गठन और धारा 30A(2) का पालन न करने की शिकायतों के बाद लगाई थी। यह धारा पब्लिक ट्रस्ट बोर्ड में जीवनभर/स्थायी रूप से नियुक्त रहने वाले ट्रस्टियों की कानूनी सीमा तय करती है।

इस रोक के चलते SRTT बैठक के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने में असमर्थ रहा। टाटा संस के दूसरे प्रमुख कंट्रोलिंग ट्रस्ट, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने पहले ही कंपनी को सूचित कर दिया था कि SRTT को मंजूरी न मिलने के कारण संयुक्त प्रतिनिधि शामिल नहीं हो सकता, जिससे कोरम अधूरा रहेगा। उल्लेखनीय है कि SDTT (~28%) और SRTT (~23.5%) के पास मिलकर टाटा संस की 51.54% की बहुमत हिस्सेदारी है।

चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के पद पर क्या होगा असर?

AGM के अचानक टलने से टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की स्थिति को लेकर कानूनी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

  • रोटेशनल रिटायरमेंट: नियमों के तहत चंद्रशेखरन को रोटेशन के आधार पर रिटायर होना है और बोर्ड में बने रहने के लिए उनकी पुनर्नियुक्ति अनिवार्य है, क्योंकि चेयरमैन के रूप में उनका पद उनके निदेशक बने रहने पर निर्भर करता है।
  • कानूनी स्थिति: कंपनीज एक्ट के तहत रोटेशन से रिटायर होने वाले निदेशक तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक संबंधित AGM संपन्न न हो जाए। हालांकि, कोरम न होने की स्थिति में क्या कानूनी परिणाम होंगे, इसे लेकर टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' (Articles of Association) की कानूनी समीक्षा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों का मत: आर्टिकल्स की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, जब तक कोरम के साथ विधिवत AGM का आयोजन नहीं हो जाता और पुनर्नियुक्ति पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक चंद्रशेखरन निदेशक पद पर बने रहेंगे।

गौरतलब है कि चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में बोर्ड में शामिल हुए थे और जनवरी 2017 में चेयरमैन बने थे। वे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फरवरी 2027 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे।

ट्रस्टियों ने व्यक्तिगत रूप से मांगी राहत

मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि SDTT द्वारा SRTT की ओर से याचिका न दायर कर पाने की स्थिति को देखते हुए, टाटा ट्रस्ट्स के कुछ ट्रस्टियों ने व्यक्तिगत तौर पर राहत पाने के लिए चैरिटी कमिश्नर का रुख किया है। फिलहाल, समूह के विधिक विशेषज्ञ बैठक के दोबारा आयोजन और कोरम की वैधानिक शर्तों को पूरा करने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।