देशभर में अंडे और चिकन की बढ़ती खुदरा कीमतों का सबसे बड़ा कारण पोल्ट्री फीड (दाना) की कीमतों में हुआ भारी उछाल है। पोल्ट्री उद्योग में कुल उत्पादन लागत का लगभग 65-70% हिस्सा दाने पर खर्च होता है, जिसमें मक्का (ऊर्जा का स्रोत) और सोयाबीन मील (प्रोटीन का स्रोत) सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं।
संकट की 3 प्रमुख वजहें
- एथेनॉल उत्पादन के कारण मक्के की किल्लत: लगभग 37% मक्का उत्पादन अब एथेनॉल डिस्टिलरीज (आसबवनी) में इस्तेमाल हो रहा है। मांग बढ़ने से मक्के की कीमतें पिछले कुछ महीनों में 20% तक बढ़कर ₹26,500 प्रति टन के पास पहुंच गई हैं।
- सोयाबीन मील की उच्च दरें: सोयाबीन फसल में आई कमी के चलते सोयाबीन मील की कीमतें ₹62,000–₹65,000 प्रति टन के आसपास बनी हुई हैं।
- फीड की दरों में 15% की वृद्धि: एक साल पहले जो पोल्ट्री फीड ₹3,600 प्रति क्विंटल मिलता था, अब उसकी कीमत लगभग ₹4,400 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।
लागत का ढांचा और ग्राहकों पर प्रभाव
जब मक्के और सोयाबीन की कीमतें बढ़ती हैं, तो पोल्ट्री किसानों के पास उत्पादन सीमित करने या कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता:
| पोल्ट्री घटक / उत्पाद | वर्तमान स्थिति और मूल्य स्तर | उद्योग पर प्रभाव |
| पोल्ट्री फीड (50 kg बोरा) | ~₹2,300 प्रति बोरा (वार्षिक 15% की वृद्धि) | किसानों के लाभ मार्जिन (Margins) में भारी गिरावट |
| फार्म-गेट अंडे की कीमत | ₹6.50 – ₹7.00 प्रति अंडा | उत्पादन लागत बढ़ने से फार्म स्तर पर कीमतें बढ़ीं |
| खुदरा अंडे की कीमत | ₹8.50 – ₹9.00 प्रति अंडा (वार्षिक 35-40% उछाल) | आम उपभोक्ता के लिए प्रोटीन सोर्स महंगा हुआ |
| ब्रॉयलर चिकन | तापमान वृद्धि व फीड लागत से कीमतें बढ़ीं | खुदरा बाजारों में चिकन की आवक और बिक्री प्रभावित |
आगे का दृष्टिकोण
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, भारत में सालाना 149 अरब से अधिक अंडों का उत्पादन होता है, जिसमें 84% से ज्यादा हिस्सा व्यावसायिक पोल्ट्री का है। आगामी सर्दियों के मौसम में अंडों की मांग आमतौर पर बढ़ती है, ऐसे में जब तक नई मक्का और सोयाबीन की फसल बाजार में नहीं आती, तब तक पोल्ट्री उत्पादों की कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है।





