चंडीगढ़ (विशेष संवाद सूत्र):

गन्ने की खेती करने वाले किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि लागत घटाने की दिशा में हरियाणा सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'चौड़ी कतार पद्धति' (Wide Row Planting) अपनाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन राशि को ₹3,000 प्रति एकड़ से बढ़ाकर ₹5,000 प्रति एकड़ कर दिया है। इस फैसले से किसानों को प्रति एकड़ सीधे ₹2,000 का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा।

क्या है योजना और कैसे मिलेंगे ₹5,000?

गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और चीनी की रिकवरी बेहतर करने के लिए सरकार गन्ने की लाइनों (कतारों) के बीच 4 फीट की दूरी रखने वाले किसानों को यह सहायता राशि प्रदान करेगी।

  • तकनीकी लाभ: खेत में कतारों की चौड़ाई बढ़ने से हवा और धूप का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे गन्ने की बढ़वार सही होती है।
  • आसान रखरखाव: चौड़ी लाइनों के कारण निराई-गुड़ाई, सिंचाई और खाद-कीटनाशक छिड़काव जैसे काम मशीनों की मदद से आसानी से किए जा सकेंगे।

उन्नत किस्मों और टिशू कल्चर (Tissue Culture) पर जोर

सरकार का ध्यान सिर्फ बुवाई के तरीके तक सीमित नहीं है, बल्कि गन्ने की बेहतरीन किस्मों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी तेजी से काम चल रहा है:

  1. उत्कृष्ट बीज उपलब्धता: स्वीकृत नई किस्मों के बीजों की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी, और जरूरत पड़ने पर पड़ोसी राज्यों से भी गुणवत्तापूर्ण बीज मंगाए जाएंगे।
  2. 4 नई टिशू कल्चर लैब: बेहतर और बीमारी-मुक्त पौध (Planting Material) तैयार करने के लिए रोहतक, महम, पानीपत और पलवल-करनाल शुगर मिलों में चार टिशू कल्चर लैब स्थापित की जाएंगी।

मजदूरों की किल्लत से निजात: हार्वेस्टिंग मशीनों से होगी कटाई

फसल कटाई के वक्त मजदूरों की कमी से जूझने वाले किसानों के लिए सरकार बड़ी राहत लेकर आई है।

  • पायलट प्रोजेक्ट: कैथल शुगर मिल क्षेत्र में 'गन्ना हार्वेस्टिंग मशीन' (Sugarcane Harvester) का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत मशीनों से ही गन्ने की कटाई कर उसे सीधे मिलों तक पहुँचाया जाएगा।
  • विस्तार योजना: कैथल में प्रयोग सफल रहने पर इसे राज्य की अन्य सहकारी चीनी मिलों के क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।

किसानों की शिकायतों का त्वरित समाधान

किसानों की समस्याओं को सीधे अधिकारियों तक पहुँचाने और पारदर्शिता लाने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है:

  • सुझाव पेटियां: सभी गन्ना तुलाई केंद्रों पर किसानों के फीडबैक और समस्याओं के लिए सुझाव पेटियां लगाई जाएंगी।
  • नियमित संवाद: शुगर मिलों के प्रबंध निदेशकों (MDs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर चार महीने में किसानों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का निवारण करें।

(नोट: प्रोत्साहन राशि, पात्रता और आवेदन से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित जिला कृषि विभाग या निकटतम सहकारी शुगर मिल से संपर्क कर सकते हैं।)