उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ वाले सार्वजनिक बयान पर राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने इस बयान को लेकर सपा प्रमुख पर जोरदार पलटवार किया है।
जयंत चौधरी का पलटवार: "ऐसा आचरण सिर्फ पतन लाता है" RLD अध्यक्ष जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए अखिलेश यादव के बयान पर गहरा ऐतराज जताया। जयंत ने कहा:
"सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते, कोई बात नहीं थी। जाट समाज को टारगेट करना और कहना 'ABCD हमने सिखाई?'... मैं इस अहंकार को देख चुका हूं करीब से और मानता हूं कि ऐसा आचरण सिर्फ पतन लाता है!"
मायावती का तीखा हमला: "चौधरी चरण सिंह के परिवार और जाट समाज से माफी मांगें अखिलेश" बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी इस मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरते हुए उनके बयान को बेहद अमर्यादित, अशोभनीय और अति-शर्मनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को न सिर्फ जयंत चौधरी और उनकी पार्टी से, बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने के लिए पूरे जाट समाज से अविलंब माफी मांगनी चाहिए।
मायावती ने सपा के राजनीतिक इतिहास पर निशाना साधते हुए कहा:
- अहंकारी और जातिवादी रवैया: देश की राजनीति में सपा का चरित्र हमेशा से संकीर्ण, जातिवादी और अविश्वसनीय रहा है, जिसका फायदा अक्सर बीजेपी को मिलता रहा है।
- गठबंधन का इतिहास: इसी अहंकारी स्वभाव के कारण 1993 का सपा-बसपा गठबंधन टूटा और 2 जून 1995 को स्टेट गेस्ट हाउस कांड जैसी हिंसक घटना हुई।
- "काम निकलते ही गिरगिट की तरह रंग बदलती है सपा": मायावती ने आरोप लगाया कि सपा केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए गठबंधन करती है और काम निकलते ही सहयोगियों के खिलाफ अनाप-शनाप भाषा का इस्तेमाल करने लगती है।
क्या था अखिलेश यादव का बयान? एक जनसभा के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने पूर्व सहयोगियों पर तंज कसते हुए कहा था कि गठबंधन में कई साथी उनके साथ आए थे, जिन्हें सपा ने "चवन्नी से रुपया बनाया", लेकिन वे बाद में साथ छोड़कर चले गए। अखिलेश के इसी बयान को RLD और BSP ने जाट समाज और उनके नेताओं के अपमान से जोड़कर सपा के खिलाफ बड़ा सियासी मोर्चा खोल दिया है।





