साल 2025 में क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के निर्यात पर चीन द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद भारत सहित कई प्रमुख देश अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में जुटे हैं। केंद्र सरकार द्वारा बजट 2026 में घोषित 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' और 'राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन' (NCMM) के बाद अब महारत्न कंपनी कोल इंडिया ने इस दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है।
सिंगापुर में ऑफिस खोलने के पीछे की मुख्य रणनीति
- रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू: सूत्रों के अनुसार, कोल इंडिया ने सिंगापुर में दफ्तर पंजीकृत (Register) कराने के लिए वहां के अधिकारियों के पास आवेदन जमा कर दिया है।
- ट्रेडिंग और संपत्ति अधिग्रहण: इस दफ्तर का मुख्य उद्देश्य आयरन ओर (लौह अयस्क) और अन्य जरूरी व रणनीतिक खनिजों के व्यापार (Trading) को बढ़ाना और विदेशों में खनिज संपत्तियों के अधिग्रहण में तेजी लाना है।
- चीन का तिलिस्म तोड़ा जाएगा: वर्तमान में भारतीय उद्योग लिथियम, बॉक्साइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे जरूरी खनिजों के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर हैं। सिंगापुर ट्रेडिंग हब के जरिए कोल इंडिया वैश्विक बाजारों से सीधे खनिज खरीद सकेगी।
इन खनिज-समृद्ध देशों पर भी कोल इंडिया की नजर
कोल इंडिया का यह ग्लोबल विजन सिर्फ सिंगापुर तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनी दुनिया भर के कई प्रमुख खनिज क्षेत्रों में संभावनाएं तलाश रही है:
- अफ्रीका और घाना: बॉक्साइट एसेट्स (Bauxite Assets) के अधिग्रहण और खनन संभावनाओं का आकलन।
- चिली: लिथियम और रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) के लिए प्रमुखता से ध्यान केंद्रित।
- कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया: अन्य महत्वपूर्ण व रणनीतिक खनिज संपत्तियों के लिए शुरुआती चरण का अध्ययन।
आयरन ओर माइनिंग में पहले ही कर चुकी है एंट्री
कंपनी ने हाल ही में गैर-कोयला खनिज क्षेत्रों में अपने कारोबार का विविधीकरण (Diversification) शुरू किया है। इसी महीने कोल इंडिया ने प्रतिस्पर्धी नीलामी के माध्यम से ओडिशा में एक आयरन ओर ब्लॉक (Iron Ore Block) हासिल किया, जिससे कंपनी ने पहली बार लौह अयस्क खनन के क्षेत्र में कदम रखा है।





