मुंबई:

घरेलू और वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी की चिंताओं के बीच चीनी की कीमतों में आए जबरदस्त उछाल से सोमवार को शेयर बाजार में चीनी उत्पादक कंपनियों के शेयरों में बंपर तेजी दर्ज की गई। बलरामपुर चीनी मिल्स, धामपुर शुगर और डालमिया भारत शुगर जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 11 फीसदी तक उछल गए। इस तिमाही के दौरान घरेलू बाजार में चीनी के दाम 41-42 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 50 रुपये प्रति किलोग्राम के आंकड़े को पार कर गए हैं।

शेयर बाजार में चीनी कंपनियों का प्रदर्शन

सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर चीनी कंपनियों के शेयरों में जोरदार लिवाली देखने को मिली:

कंपनी का नामशेयर का भाव (रुपये में)तेजी (%)
उत्तम शुगर₹359+11%
धामपुर शुगर मिल्स₹200+8%
त्रिवेणी इंजीनियरिंग₹306+4%
EID पैरी₹831+4%
बलरामपुर चीनी मिल्स₹752+3%

कीमतों में तेजी के 4 मुख्य कारण

1. त्योहारी सीजन की भारी मांग भारत में अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों के लिए चीनी की मांग चरम पर होती है। पिछले महीने चीनी की एक्स-मिल कीमतें 20% तक बढ़ी हैं। सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों और थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा घटाकर 15 दिन कर दी है।

2. ब्राजील से सप्लाई की अनिश्चितता दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश ब्राजील में प्रतिकूल मौसम के कारण फसल की कटाई में देरी हो रही है। अनिश्चितता यह है कि ब्राजील ने अपनी पाक्षिक उत्पादन रिपोर्ट भी रोक दी है। इसके अलावा, जून में ब्राजील ने 58% गन्ने का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया और इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य बढ़ाकर 32% कर दिया है।

3. अल-नीनो और भीषण गर्मी की मार यूरोपीय संघ (EU) और यूके में भीषण गर्मी के कारण चीनी उत्पादन घटकर 14.98 मिलियन टन रहने का अनुमान है। वहीं, थाईलैंड (दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक) ने अपने उत्पादन अनुमान में 15.6% की कटौती करके इसे 9.5 मिलियन टन कर दिया है। भारत में भी गन्ने का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

4. वैश्विक घाटे का अनुमान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी की सप्लाई में भारी कमी का अनुमान जताया गया है:

  • ग्रीन पूल: 3.3 मिलियन टन की वैश्विक कमी।
  • स्टोनएक्स: 1.7 मिलियन टन की कमी।
  • इंटरनेशनल शुगर ऑर्गनाइजेशन (ISO): 0.26 मिलियन टन का घाटा।

सरकार का कड़ा रुख

त्योहारी सीजन से पहले कीमतों को नियंत्रित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। चीनी मिलों के लिए 17 से 19 अगस्त के बीच हुई बिक्री, खरीदारों और कीमतों का ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है। जानकारों का मानना है कि वैश्विक और घरेलू स्थितियों को देखते हुए अगले तीन महीनों तक चीनी की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रह सकती हैं।