नई दिल्ली:
भारत डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एशिया-प्रशांत (APAC) का नया पावरहाउस बनकर उभरा है। चीन के बाद भारत अब इस क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा डेटा सेंटर बाजार बन गया है। ब्लूमबर्ग न्यू एनर्जी फाइनेंस (BNEF) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पिछले छह वर्षों में देश की लाइव आईटी क्षमता 4 गुना बढ़कर 1.7 गीगावाट (GW) हो चुकी है।
ऊर्जा की प्रचुर उपलब्धता और मजबूत फाइबर कनेक्टिविटी के कारण वैश्विक और घरेलू टेक दिग्गज डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए भारत को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं।
प्रोजेक्ट पाइपलाइन और क्षमता विस्तार
भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र का विस्तार तेजी से हो रहा है और इसकी भावी पाइपलाइन बेहद मजबूत है:
- निर्माणाधीन क्षमता: 1.3 गीगावाट (GW)
- मंजूरशुदा परियोजनाएं: 3.2 गीगावाट क्षमता के लिए जमीन, बिजली और निर्माण की प्रक्रिया पूरी।
- प्रमुख बाजार (महाराष्ट्र): देश की कुल लाइव आईटी क्षमता में 55% हिस्सेदारी के साथ महाराष्ट्र पहले स्थान पर बना हुआ है।
महाराष्ट्र के अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर विकास के अगले बड़े केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
निवेश का आंकड़ा: घरेलू दिग्गज और ग्लोबल टेक जायंट्स
डेटा सेंटर क्षेत्र में घोषित कुल निवेश का 95% हिस्सा बड़े हाइपरस्केल एआई कैंपस पर केंद्रित है।
- घरेलू कारोबारी समूह: भारतीय कंपनियों ने $210 अरब (लगभग 45% हिस्सेदारी) के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
- ग्लोबल हाइपरस्केलर्स: टेक दिग्गज गूगल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट ने मिलकर $84 अरब के निवेश की घोषणा की है।
बिजली की खपत और ग्रीन एनर्जी लक्ष्य
BNEF रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर्स की बिजली मांग 2025 में 11 टेरावाट-घंटे (TWh) से बढ़कर 2035 तक 91 TWh पहुंच जाएगी—जो कि 8 गुना से अधिक की वृद्धि है।
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत की बिजली उत्पादन क्षमता 2021 से 7.1% की वार्षिक दर (CAGR) से बढ़ रही है। अधिकांश हाइपरस्केलर कंपनियों ने 2030 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, जिससे इस क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) की मांग में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिलेगा।





