त्योहारी सीजन से ठीक पहले सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बनाना शुरू कर दिया है। घरेलू बाजार में सोना ₹1.63 लाख प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया है, वहीं चांदी भी ₹2.46 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही है। अकेले अगस्त महीने के 26 दिनों में सोना ₹19,852 और चांदी ₹25,945 तक महंगी हो चुकी है।
बाजार की इस अप्रत्याशित तेजी, भविष्य के आउटलुक और निवेश की रणनीति पर कमोडिटी एक्सपर्ट महेंद्र लुनिया से की गई बातचीत के प्रमुख अंश:
1. अगस्त में अचानक आई इस बड़ी तेजी के मुख्य कारण क्या हैं?
इस तेजी के पीछे तीन मुख्य वैश्विक कारण हैं:
- कमजोर डॉलर व अमेरिकी कर्ज: अमेरिका पर $40 ट्रिलियन से अधिक का कर्ज होने से डॉलर पर वैश्विक भरोसा कम हुआ है, जिससे निवेशकों का रुझान सोने की तरफ बढ़ा है।
- जियोपॉलिटिकल तनाव: दुनिया भर में जारी युद्ध के माहौल के कारण सोना सुरक्षित निवेश (Safe Haven) बना हुआ है।
- सेंट्रल बैंकों की खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने केवल दो तिमाहियों में 280 टन सोने की जमकर खरीदारी की है।
2. क्या आगे कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की संभावना है?
फिलहाल बड़ी गिरावट के आसार बहुत कम हैं। हालांकि, यदि क्रूड ऑयल $120 तक जाता है तो डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे सोने पर मामूली दबाव आ सकता है। इसके अलावा, युद्ध का तनाव घटने या अमेरिका में महंगाई कम होने पर ही सीमित करेक्शन देखने को मिल सकता है।
3. क्या दिवाली तक सोना ₹2 लाख और चांदी ₹4 लाख का आंकड़ा पार करेगी?
दिवाली तक सोना ₹2 लाख का आंकड़ा तो नहीं छुएगा, लेकिन अगले 1 से 1.5 महीने में यह ₹1.75 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकता है। वहीं चांदी तुरंत ₹4 लाख भले न पहुंचे, लेकिन जल्द ही ₹3.25 लाख से ₹3.50 लाख प्रति किग्रा के स्तर को छू सकती है।
4. फेस्टिव और वेडिंग सीजन के लिए खरीदारी का सही समय क्या है?
- शादी-विवाह के लिए: यदि गहनों की तत्काल जरूरत है, तो अभी लाइटवेट ज्वेलरी खरीदी जा सकती है।
- निवेशकों के लिए: शुद्ध निवेश के उद्देश्य से खरीदने वाले लोग अंतरराष्ट्रीय बाजार में $50-$100 की छोटी गिरावट का इंतजार कर सकते हैं। अगले 2-3 सालों में सोना बेहद मजबूत रिटर्न देने वाला है।
5. कच्चे तेल और कमजोर रुपये का भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
भारत में पिछले दो तिमाहियों में ही 131 टन सोने की मांग रही है। क्रूड ऑयल महंगा होने पर भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपया कमजोर होगा। रुपया कमजोर होने का सीधा असर यह होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता होने के बावजूद भारत में कीमतें ऊंची ही रहेंगी।
6. आम उपभोक्ताओं को फिजिकल गोल्ड के बजाय डिजिटल गोल्ड क्यों चुनना चाहिए?
जैसे शेयर ट्रेडिंग पर्चियों से निकलकर मोबाइल डीमैट में आई और भुगतान UPI से होने लगा, वैसे ही गोल्ड का भविष्य भी डिजिटल है। उपभोक्ता अपने फैमिली ज्वैलर के ऐप के जरिए ₹500 या ₹1,000 की छोटी किश्तों में डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं। आने वाले समय में वैश्विक मुद्राएं सोने से बैक होंगी, इसलिए डिजिटल गोल्ड ही भविष्य है।
बाजार का ताजा हाल (26 अगस्त):
| बाजार / धातु | सोना (Gold) | चांदी (Silver) |
| MCX वायदा भाव | ₹1,62,403 / 10 ग्राम (₹479 की गिरावट) | ₹2,43,850 / किग्रा (₹277 की गिरावट) |
| अंतर्राष्ट्रीय बाजार (COMEX) | $4,682 / औंस (0.25% की गिरावट) | $68.53 / औंस (0.22% की गिरावट) |
| अगस्त महीने में कुल बढ़त | +₹19,852 (31 जुलाई: ₹1,43,948) | +₹25,945 (31 जुलाई: ₹2,18,769) |





