नई दिल्ली: आगामी त्योहारों के सीजन में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। सरकार ने रॉ शुगर (कच्ची चीनी) के ड्यूटी-फ्री (शुल्क-मुक्त) आयात से जुड़े नियमों में ढील देते हुए आयातकों को बड़ी राहत दी है। सरकार के इस फैसले के सामने आते ही शेयर बाजार में चीनी कंपनियों (शुगर स्टॉक्स) के शेयरों में भारी बिकवाली और गिरावट देखने को मिली।
शेयर बाजार में शुगर स्टॉक्स धड़ाम
सरकार की घोषणा के तुरंत बाद 25 अगस्त को शेयर बाजार में शुगर कंपनियों के शेयरों पर दबाव आ गया। बलरामपुर चीनी, बजाज हिंदुस्तान शुगर, श्री रेणुका शुगर्स जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयर ट्रेडिंग के दौरान 3.5 फीसदी तक टूट गए।
निवेशकों को आशंका है कि आयात नियमों में ढील से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई अचानक बढ़ेगी, जिससे चीनी की कीमतें नियंत्रित रहेंगी। कीमतों में नरमी का सीधा असर चीनी मिलों के प्रॉफिट मार्जिन (मुनाफे) पर पड़ेगा, जिसके चलते निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली (Profit-Booking) की।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
- महंगाई पर लगाम: त्योहारी सीजन के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत काफी बढ़ जाती है। हाल के दिनों में चीनी के दामों में उछाल देखा गया था, जिसे काबू में रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
- जमाखोरी पर रोक: बाजार में चीनी की पर्याप्त और निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करके सरकार कालाबाजारी और जमाखोरी पर नकेल कसना चाहती है।
आयातकों को मिली 2 महीने की नई सहूलियत
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 20 अगस्त के अपने पिछले नोटिफिकेशन में संशोधन किया है:
- पहले 31 अक्टूबर 2026 तक टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी गई थी और 31 अक्टूबर तक ही रिफाइंड चीनी बेचने की सख्त डेडलाइन थी।
- नई राहत: अब DGFT ने इस फिक्स डेडलाइन को हटा दिया है। आयातकों को अब 'बिल ऑफ एंट्री' दाखिल करने की तारीख से पूरे दो महीने का समय मिलेगा, जिससे उन्हें प्रोसेसिंग और सप्लाई के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
एडवांस ऑथराइजेशन पर वन-टाइम कन्वर्जन की छूट
सरकार ने व्यापारियों को राहत देते हुए SION E-52 के तहत जारी एडवांस ऑथराइजेशन को एक बार के लिए TRQ योजना में बदलने की अनुमति दी है। यह छूट 20 अगस्त तक आयात की जा चुकी कच्ची चीनी और उससे प्रोसेस होने वाली रिफाइंड चीनी पर लागू होगी। हालांकि, इस लाभ को प्राप्त करने के लिए कंपनियों को आयात के समय ली गई जीएसटी (GST) छूट का भुगतान करना अनिवार्य होगा।





