पंजाब विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी राजनीतिक बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। आधिकारिक तौर पर भले ही गठबंधन की अटकलों को खारिज किया जा रहा हो, लेकिन सूत्रों के मुताबिक बीजेपी और उसके पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के शीर्ष नेतृत्व के बीच पर्दे के पीछे सीट-शेयरिंग पर गहन मंथन चल रहा है।
सीट शेयरिंग: 55 सीटों पर अड़ी बीजेपी, 45 देने को तैयार अकाली दल
पुराने फॉर्मूले के तहत पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों में से अकाली दल 94 और बीजेपी महज 23 सीटों पर चुनाव लड़ा करती थी। हालांकि, बदला हुआ राजनीतिक समीकरण इस बार अलग है:
- बीजेपी की मांग: राज्य में अपनी बढ़ी हुई ताकत का हवाला देते हुए बीजेपी इस बार लगभग बराबरी के हिस्से (करीब 55 सीटें) की मांग कर रही है।
- अकाली दल का प्रस्ताव: शिरोमणि अकाली दल, बीजेपी को 45 से ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।
सीटों की कुल संख्या तय होने के बाद ही यह फैसला होगा कि कौन सी विशेष सीट किस पार्टी के खाते में जाएगी।
गठबंधन की राह में 3 प्रमुख पेंच
- मुख्यमंत्री पद का चेहरा: बीजेपी चाहती है कि चुनाव नतीजों के बाद ही सीएम के नाम पर फैसला हो, जबकि अकाली दल चुनाव से पहले ही सुखबीर सिंह बादल को आधिकारिक चेहरा घोषित करना चाहता है।
- अर्ध-शहरी (Semi-Urban) सीटें: सेमी-अर्बन क्षेत्रों की सीटों पर दोनों पार्टियां अपना-अपना उम्मीदवार उतारने के लिए अडिग हैं।
- 50-50 का फॉर्मूला: बीजेपी पंजाब में 'बड़े भाई' की भूमिका से कम पर समझौते के मूड में नजर नहीं आ रही है।
अकेले चुनाव लड़ने का 'प्लान-बी' भी तैयार
गठबंधन पर सहमति न बनने की स्थिति में बीजेपी ने राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रखी है। हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष ने पंजाब दौरे के दौरान राज्य इकाई के नेताओं को सभी 117 सीटों पर पूरी ताकत के साथ उतरने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों का यह भी संकेत है कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के जापान दौरे से वापस लौटते ही पंजाब में NDA के पुनर्गठन को लेकर अंतिम बातचीत में तेजी आएगी।





