नासिक (महाराष्ट्र): देश की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में शामिल लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) में पिछले एक हफ्ते के भीतर प्याज की थोक कीमतों में 25 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कीमतों में इस उछाल को देखते हुए केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है, ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
व्यापारियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारत में देर से हुई बुवाई के कारण खरीफ फसल के आगमन में देरी हो रही है, जिससे आने वाले हफ्तों में प्याज की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
लासलगांव मंडी: एक हफ्ते में ₹27 प्रति किग्रा पहुंचा औसत भाव
लासलगांव मंडी में 5 अगस्त से लेकर हालिया कारोबारी दिनों में कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है:
| प्याज की श्रेणी | 5 अगस्त का भाव (₹/किग्रा) | हालिया भाव (₹/किग्रा) | प्रतिशत वृद्धि |
| औसत गुणवत्ता (Average Quality) | ₹21.50 | ₹27.00 | ~25.58% |
| सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता (Top Quality) | ₹24.00 | ₹30.00 | 25.00% |
सितंबर से बफर स्टॉक बेचेगी सरकार; खरीद लक्ष्य से पीछे
बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार सितंबर के पहले हफ्ते से बफर स्टॉक से प्याज बेचना शुरू करेगी।
- खरीद लक्ष्य में कमी: इस सीजन में सरकार ने किसानों से प्याज की न्यूनतम सुनिश्चित खरीद दर (Assured Procurement Price) में 7 बार बढ़ोतरी की, इसके बावजूद सरकारी एजेंसियों का कुल खरीद आंकड़ा 2,00,000 टन के निर्धारित लक्ष्य से लगभग 25 फीसदी कम रहा है।
कीमतें क्यों बढ़ रही हैं और आगे क्या हैं चुनौतियाँ?
- दक्षिणी राज्यों से आवक में देरी: आमतौर पर मार्च-अप्रैल में स्टोर की गई रबी प्याज की फसल अक्टूबर तक देश की मुख्य मांग पूरी करती है। इसे कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आने वाली छोटी खरीफ फसल से सहारा मिलता है। लेकिन इस साल दक्षिण में देरी से बुवाई के कारण नई फसल का आगमन पिछड़ गया है।
- महाराष्ट्र में मानसून का देर से आना: नासिक और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की देरी से मुख्य खरीफ फसल के आने में भी समय लगेगा।
- फसल की गुणवत्ता पर असर: निर्यातकों का कहना है कि हालांकि रबी प्याज के भंडारण की मात्रा में कमी नहीं थी, लेकिन खराब मौसम के कारण इस साल प्याज की शेल्फ-लाइफ और गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
मौसम पर टिकी निगाहें:
प्याज निर्यातकों के अनुसार, "आने वाले महीनों में प्याज की कीमतों का रुख सितंबर महीने के मौसम पर निर्भर करेगा। यदि दक्षिण भारत में बारिश से फसल को नुकसान नहीं होता है और गुणवत्ता अच्छी रहती है, तो कीमतें नियंत्रण में रहेंगी। वरना कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।"





