नई दिल्ली।

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने प्रदर्शन स्थलों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा जमाए रखने की प्रवृत्ति पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी प्रदर्शनकारी समूह किसी सार्वजनिक स्थान पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं जमा सकता।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की पीठ ने कहा कि प्रदर्शन का अधिकार संविधान प्रदत्त है, लेकिन अन्य नागरिकों के व्यापार और आजीविका का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

"किसान, मजदूर और ट्रेड यूनियन कहां जाएंगे?" - सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने सार्वजनिक स्थलों पर निष्पक्ष पहुंच की वकालत करते हुए कई अहम सवाल खड़े किए:

  • सबके अधिकार का सम्मान: सीजेआई ने कहा, "यदि एक ही समूह किसी जगह पर हमेशा कब्जा जमाए रखेगा, तो देश के किसान, मजदूर, ट्रेड यूनियनें और बेघर लोग अपनी मांगों के लिए कहां जाएंगे?"
  • सीमित समय के लिए अनुमति: अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन स्थल का इस्तेमाल एक निश्चित अवधि के लिए ही होना चाहिए ताकि दूसरे संगठनों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिल सके।
  • अदालत ने जताया ऐतराज: सुनवाई के दौरान वकीलों द्वारा एक-दूसरे के बीच बोलने पर नाराजगी जताते हुए सीजेआई ने कहा, "आप लोगों ने कोर्ट को मछली बाजार बना रखा है... क्या आपको कोर्ट के डेकोरम का अंदाजा नहीं है?"

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व्यापारियों का ₹2,000 करोड़ का नुकसान बनाम राज्य की पाबंदियां

सुनवाई के दौरान प्रदर्शनों के आर्थिक असर पर भी तीखी बहस देखने को मिली:

व्यापारियों का पक्ष (वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी):

  • रामलीला मैदान के पास स्थित असफ अली रोड, दरियागंज, तुर्कमान गेट और कमला मार्केट जैसे थोक बाजारों को त्यौहारों के सीजन में भारी नुकसान हुआ है।
  • प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को लगभग ₹2,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है, जिसका सीधा असर दिहाड़ी मजदूरों, टेंपो चालकों और सहायक कामगारों पर पड़ा है।

जस्टिस बागची का सवाल:

  • पीठ के सदस्य जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पूछा कि नुकसान के लिए केवल प्रदर्शनकारियों को ही जिम्मेदार क्यों माना जाए? क्या राज्य द्वारा की जाने वाली बैरिकेडिंग, सड़कें बंद करना या आर्थिक स्थितियां भी बिक्री में गिरावट की वजह नहीं हैं?

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता का तर्क:

  • सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कई बार प्रदर्शन हिंसक रूप ले लेते हैं और दुकानें जबरन बंद कराई जाती हैं।
  • उन्होंने 'कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)' का उदाहरण देते हुए बताया कि 1 दिन की अनुमति लेकर 17 दिनों तक प्रदर्शन जारी रखा गया और बिना अनुमति संसद भवन की ओर मार्च का प्रयास किया गया।

सार्वजनिक स्थान और निजता का अधिकार

प्रदर्शनकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन स्थलों की कमी और निगरानी (CCTV/Privacy) का मुद्दा उठाया:

  • प्रशांत भूषण ने दलील दी कि सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करने वालों की कानूनी सीमा से परे निगरानी नहीं होनी चाहिए।
  • इस पर सॉलिसिटर जनरल ने पलटवार करते हुए कहा कि 500-600 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स खुद लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे हैं, फिर आधिकारिक सीसीटीवी निगरानी पर आपत्ति क्यों?
  • अदालत का रुख: सीजेआई ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर मौजूद रहने के दौरान 'निजता की अपेक्षा' (Expectation of Privacy) की कानूनी सीमा पर विचार करना होगा।

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