पटना।
बिहार सरकार ने राज्य के नगर निकायों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। हाल ही में जारी नए अध्यादेश के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारों, भवन निर्माण की स्वीकृति, व्यावसायिक लाइसेंस और विज्ञापन व्यवस्था से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव किए गए हैं। इस नई व्यवस्था के तहत अब नगर निकायों में मेयर (महापौर) की भूमिका और अधिकार पहले से कहीं अधिक मजबूत होंगे।
सशक्त स्थायी समिति के अध्यक्ष होंगे मेयर, महीने में दो बैठकें अनिवार्य
नए प्रावधानों के मुताबिक, नगरपालिका की सभी कार्यपालक शक्तियां 'सशक्त स्थायी समिति' में निहित होंगी और मेयर इस समिति के अध्यक्ष होंगे। प्रशासनिक कामकाज और निर्णयों में गतिशीलता लाने के लिए कई नियम तय किए गए हैं:
- बैठकों की अनिवार्यता: मेयर को हर महीने सशक्त स्थायी समिति की कम से कम दो बैठकें बुलानी होंगी।
- तय दिन: सामान्य परिस्थितियों में ये बैठकें महीने के पहले और तीसरे सोमवार को आयोजित की जाएंगी (सार्वजनिक अवकाश होने पर तिथि में बदलाव किया जा सकेगा)।
- वैकल्पिक व्यवस्था: यदि किसी अपरिहार्य कारणवश मेयर बैठक बुलाने में असमर्थ रहते हैं, तो उप मेयर को बैठक आमंत्रित करने का अधिकार होगा।
आपात स्थिति में बिना पूर्व अनुमति काम कराने का विशेष अधिकार
अध्यादेश के तहत मेयर को संकट और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं। अब आपात स्थिति में मेयर बोर्ड या समिति की पूर्व अनुमति के बिना भी जरूरी और त्वरित कार्य कराने का निर्देश दे सकेंगे। हालांकि, इस प्रकार कराए गए कार्यों की पूरी जानकारी 15 दिनों के भीतर संबंधित समिति या बोर्ड को देना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही प्रशासनिक नियंत्रण को स्पष्ट करते हुए मुख्य नगरपालिका पदाधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया है, जिनके अधीन नगर निकाय के सभी पदाधिकारी और कर्मचारी कार्य करेंगे।
भवन निर्माण और नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया हुई आसान
आम नागरिकों और बिल्डर्स को राहत देते हुए भवन का नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को सरल और ऑनलाइन किया गया है:
- स्वतः अनुमोदन (Self-Approval): नई व्यवस्था के तहत भवन निर्माण योजनाएं स्वतः अनुमोदित हो सकेंगी या सक्षम प्राधिकारी से त्वरित मंजूरी मिल सकेगी।
- पोर्टल आधारित कार्य: सूचीबद्ध वास्तुविदों (Architects) को सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए ही कार्य करना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण से जुड़ी सभी तकनीकी स्वीकृतियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) समय पर प्राप्त हो जाएं।
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दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस ऑनलाइन
व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने के लिए दुकानों व गैर-आवासीय प्रतिष्ठानों के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल (ऑनलाइन) कर दिया गया है:
- कारोबारी घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे।
- निर्धारित समयावधि में लाइसेंस शुल्क का भुगतान न करने पर प्रति माह अधिकतम 1% तक का दंड लगाया जा सकेगा, लेकिन कुल दंड की राशि किसी भी स्थिति में वार्षिक लाइसेंस शुल्क से अधिक नहीं होगी।
विज्ञापन टैक्स की जगह ‘विज्ञापन शुल्क’ और कड़े जुर्माने के नियम
जीएसटी लागू होने के बाद विज्ञापन से जुड़े करों में हुए बदलावों को ध्यान में रखते हुए अब 'विज्ञापन टैक्स' के स्थान पर 'विज्ञापन शुल्क' वसूला जाएगा। सार्वजनिक स्थानों, दीवारों, होर्डिंग्स और बैनरों पर विज्ञापन के लिए कड़े नियम और सुरक्षा मानक तय किए गए हैं:
- मानक उल्लंघन पर जुर्माना: सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था या रखरखाव के तय मानकों का उल्लंघन करने पर ₹5 लाख तक का जुर्माना लग सकता है।
- बिना शुल्क विज्ञापन पर दंडात्मक कार्रवाई:
- सामान्य मामला: निर्धारित शुल्क दिए बिना विज्ञापन लगाने पर दोगुना जुर्माना।
- पुनरावृत्ति पर: नोटिस के बाद भी उल्लंघन जारी रखने या 12 महीने के भीतर दोबारा गलती करने पर तिगुना जुर्माना।
- सुरक्षा में बाधा पर: यदि विज्ञापन के कारण यातायात, जल निकासी, अग्निशमन या आपदा प्रबंधन ढांचे में बाधा उत्पन्न होती है, तो पाँच गुना तक जुर्माना वसूला जाएगा।
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