जयपुर / हल्दीघाटी।

राजस्थान की वीरधरा और ऐतिहासिक संग्राम भूमि हल्दीघाटी जल्द ही एक नए और भव्य स्वरूप में दुनिया के सामने चमकने जा रही है। मेवाड़ के महान योद्धा और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की स्मृतियों व पराक्रम को अमर बनाने के उद्देश्य से हल्दीघाटी में उनकी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत 168.39 करोड़ रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) का बजट स्वीकृत किया गया है, जिसके माध्यम से एक विश्वस्तरीय ‘महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट’ विकसित किया जाएगा। यह पहल न केवल राजस्थान की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाएगी, बल्कि देश-विदेश के लाखों पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनेगी।

राजस्थान सरकार और NBCC के बीच ऐतिहासिक करार

सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी निर्माण कंपनी एनबीसीसी लिमिटेड (NBCC Limited) इस संपूर्ण पर्यटन सर्किट के निर्माण और विकास का कार्य संभालेगी। राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग, राजस्थान हेरिटेज अथॉरिटी तथा एनबीसीसी के बीच इस संबंध में आधिकारिक सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।

परियोजना की मुख्य बिंदु:

  • संचालन एवं रखरखाव: एनबीसीसी योजना के खाके (डिजाइन) से लेकर निर्माण कार्य और परिसर के पूरा होने के बाद संचालन व रखरखाव (O&M) की पूरी जिम्मेदारी निभाएगी।
  • लागत एवं शुल्क: स्वीकृत परियोजना लागत ₹168.39 करोड़ तय की गई है। इसके अतिरिक्त कंपनी को वास्तविक निर्माण लागत का 4.25% प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) शुल्क दिया जाएगा।
  • समय सीमा: संपूर्ण निर्माण कार्य को निर्धारित और कड़े समय-सीमा में पूरा करने का दायित्व एनबीसीसी पर रहेगा।

चेतक पर सवार महाराणा प्रताप और अत्याधुनिक संग्रहालय

इस टूरिस्ट सर्किट की सबसे बड़ी विशेषता महाराणा प्रताप की गगनचुंबी विशाल प्रतिमा होगी, जो विश्व में उनकी सबसे ऊंची प्रतिमा का कीर्तिमान रचेगी।

इसके साथ ही, परिसर में एक विश्वस्तरीय ऐतिहासिक संग्रहालय भी स्थापित किया जाएगा:

  • स्वामिभक्त चेतक का स्मरण: संग्रहालय में महाराणा प्रताप को उनके महान और निष्ठावान घोड़े चेतक पर सवार दर्शाया जाएगा।
  • साहस और संघर्ष की गाथा: संग्रहालय के माध्यम से भावी और वर्तमान पीढ़ी को भारत के समृद्ध इतिहास, अदम्य साहस, और स्वाभिमान की प्रेरक कहानियों से जोड़ा जाएगा।

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टोपोग्राफिकल प्रोजेक्शन शो से जीवंत होगा हल्दीघाटी का युद्ध

परियोजना में इतिहास और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा:

  • अत्याधुनिक टोपोग्राफिकल प्रोजेक्शन शो: हल्दीघाटी स्मारक पर एक विशेष डिजिटल प्रोजेक्शन शो का आयोजन किया जाएगा।
  • जीवंत अनुभव: इस शो के जरिए वर्ष 1576 के प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध के प्रमुख प्रसंगों, रणनीतिक संघर्षों और महाराणा प्रताप के जीवन के ऐतिहासिक पन्नों को दृश्यात्मक रूप से जीवंत किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त होगा।

राजस्थान पर्यटन को मिलेगी नई बुलंदी

विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप तैयार हो रहे इस पर्यटन सर्किट से हल्दीघाटी एक अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक केंद्र के रूप में उभरेगा। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ ही राजस्थान के पर्यटन उद्योग को एक नई दिशा और वैश्विक पहचान मिलेगी।

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