नई दिल्ली / टोक्यो:

भारत और जापान के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक दोस्ती अब एक ठोस आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी साझेदारी में बदलने जा रही है। दोनों देश व्यापार संतुलन, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर तकनीक और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर रणनीति तैयार कर रहे हैं। इस नई गति की नींव जुलाई में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान रखी गई थी, जहां जापान ने अगले एक दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन (जापानी मुद्रा) के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया था।

व्यापार घाटा पाटने पर भारत का कड़ा रुख

भारत-जापान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की समीक्षा इस रणनीतिक बातचीत का केंद्रीय बिंदु है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार के आंकड़े भारत के पक्ष में असंतुलन को दर्शाते हैं:

विवरणआंकड़ा (वित्त वर्ष 2025-26)
कुल द्विपक्षीय व्यापार$27.47 अरब
जापान का भारत को निर्यात$21.43 अरब
भारत का जापान को निर्यात$6.04 अरब

भारत इस बड़े व्यापार घाटे को कम करने के लिए जापानी बाजार में अपने उत्पादों की अधिक पहुंच की निरंतर मांग कर रहा है, ताकि यह साझेदारी दोनों पक्षों के लिए बराबरी की बन सके।

उत्तर प्रदेश से लेकर टोक्यो तक जमीनी कार्रवाई

इस साझेदारी को धरातल पर उतारने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं:

  • उत्तर प्रदेश में निवेश: राज्य में आयोजित 'यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट' में 200 से अधिक जापानी बिजनेस लीडर्स और सीईओ ने हिस्सा लिया। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में जापान समर्थित दो बड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।
  • पीयूष गोयल का जापान दौरा: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 27 अगस्त तक जापान के दौरे पर हैं। उनके साथ 200 से अधिक प्रतिनिधियों का अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यापारिक दल गया है, जो टोक्यो, नागोया और ओसाका में सेमीकंडक्टर, एआई (AI) और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर चर्चा कर रहा है।

इंडो-पैसिफिक में सुरक्षा और तकनीकी कवच

आर्थिक सहयोग के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को भी नया आयाम दिया जा रहा है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक जहाज निर्माण (Naval Shipbuilding) के संयुक्त विकास और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। जापान की उन्नत तकनीक व पूंजी तथा भारत के विशाल बाजार व मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का यह मेल क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को नई दिशा देगा।