नई दिल्ली: देश में हल्दी, अदरक, लहसुन, धनिया, जीरा, सौंफ और काली मिर्च जैसे मसालों की मांग और खेती दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। किसानों की आय बढ़ाने और खेती की लागत को कम करने के उद्देश्य से सरकार एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH - Mission for Integrated Development of Horticulture) के तहत किसानों को बंपर सब्सिडी प्रदान कर रही है।
सामान्य क्षेत्रों में किसानों को लागत का 40% तक और पूर्वोत्तर व हिमालयी जैसे विशेष क्षेत्रों में 50% तक सहायता दी जा रही है।
किन मसालों की खेती पर और कितनी मिलेगी सब्सिडी?
MIDH के तहत मसालों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर सहायता राशि (प्रति हेक्टेयर) तय की गई है:
| मसाला श्रेणी | शामिल फसलें | तय लागत (रु/हेक्टेयर) | सामान्य क्षेत्र सहायता (40%) | विशेष/पहाड़ी क्षेत्र सहायता (50%) |
| बीज वाले मसाले | जीरा, धनिया, सौंफ, अजवाइन, मेथी, कलौंजी, काला जीरा | ₹50,000 | ₹20,000 तक | ₹25,000 तक |
| कंद व गांठ वाले मसाले | अदरक, हल्दी और लहसुन | ₹1,00,000 | ₹40,000 तक | ₹50,000 तक |
| दीर्घकालिक बहुवर्षीय मसाले | काली मिर्च, दालचीनी, तेजपत्ता, लौंग, जायफल, बड़ी/छोटी इलायची, वनीला, करी पत्ता | ₹1,00,000 | ₹40,000 तक | ₹50,000 तक |
ध्यान दें: यह सब्सिडी अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए लागू होगी। सहायता राशि सीधी नकद न देकर दो किस्तों (60% और 40%) में पौध सामग्री, खाद, पोषण व कीट नियंत्रण की जरूरतों के आधार पर जारी की जाती है।
फंडिंग का पैटर्न: केंद्र और राज्यों की हिस्सेदारी
- सामान्य राज्य: योजना खर्च का 60% हिस्सा केंद्र सरकार और 40% राज्य सरकार देती है।
- उत्तर-पूर्व और हिमालयी राज्य: केंद्र सरकार 90% और राज्य सरकार 10% योगदान देती है।
योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी दस्तावेज
आवेदन करते समय किसानों को मुख्य रूप से निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:
- भूमि संबंधी दस्तावेज: खसरा/खतौनी (जमीन की जमाबंदी या स्वामित्व प्रमाण)।
- पहचान व निवास प्रमाण: पहचान पत्र (जैसे वोटर ID, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस) तथा स्थायी निवास का प्रमाण।
- बैंक खाता विवरण: बैंक पासबुक की प्रति (डीबीटी/अनुदान राशि हस्तांतरण के लिए)।
- अन्य आवश्यक दस्तावेज: पासपोर्ट साइज फोटो और बागवानी विभाग द्वारा मांगे गए अन्य क्षेत्रीय शपथ-पत्र या प्रमाण-पत्र।
आवेदन प्रक्रिया: कैसे उठाएं लाभ?
- बागवानी विभाग से संपर्क: चूंकि इस योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकारों के माध्यम से होता है, इसलिए सबसे पहले अपने जिले के जिला उद्यान/बागवानी अधिकारी (Horticulture Department) या राज्य की हॉर्टिकल्चर मिशन एजेंसी के कार्यालय में जाएं।
- पात्रता की जांच: अपनी जमीन और फसल के अनुसार योजना की पात्रता जांचें।
- आवेदन जमा करें: विभाग द्वारा निर्देशित ऑनलाइन पोर्टल या ऑफलाइन माध्यम से जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन फॉर्म जमा करें।
- सत्यापन: विभागीय अधिकारियों द्वारा क्षेत्र और फसल के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के बाद सब्सिडी स्वीकृत की जाएगी।





