उदयपुर स्थित 'सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय' (महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय) में मोटे अनाज और पारंपरिक फसलों के प्रसंस्करण पर आधारित पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत ‘मेवाड़ क्षेत्र की पारंपरिक फसलों के प्रसंस्करण का उत्कृष्टता केंद्र’ परियोजना के तहत आयोजित हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण की तकनीकों से जोड़कर स्वरोजगार के लिए तैयार करना है।

पारंपरिक फसलों से आधुनिक व्यंजनों की ट्रेनिंग प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मिलेट्स और पारंपरिक फसलों में मूल्य संवर्धन (Value Addition) कर बाजार की मांग के अनुसार आकर्षक उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। युवाओं ने निम्नलिखित खाद्य उत्पाद बनाने की तकनीक सीखी:

  • बेकरी प्रोडक्ट्स: विभिन्न प्रकार के मिलेट कुकीज, केक और मफिन्स।
  • स्नैक्स और न्यूट्रिशन: चॉकलेट, न्यूट्रिएंट-रिच पौष्टिक बार, क्रैकर्स, चकली और खाखरा।

गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार की संभावनाओं पर जोर प्रशिक्षण में केवल उत्पाद तैयार करने पर ही नहीं, बल्कि उनकी शेल्फ-लाइफ, पोषण गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग और बाजार में बेहतर प्रस्तुतीकरण पर भी विशेष मार्गदर्शन दिया गया।

  • पोषण और दैनिक उपयोग: महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सरला लखावत ने मिलेट्स की बढ़ती वैश्विक मांग और दैनिक आहार में इनके इस्तेमाल पर जोर दिया।
  • स्वरोजगार की संभावनाएं: परियोजना प्रभारी डॉ. कमला महाजनी ने मिलेट्स के स्वास्थ्य लाभों के साथ-साथ इनके जरिए खुद का एग्रो-बिजनेस या स्मॉल-स्केल फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू करने के अवसरों की जानकारी दी।
  • गुणवत्ता मानक: प्रोफेसर डॉ. रेनू मोगरा ने मिलेट प्रोसेसिंग की बारीकियां बताईं, जबकि अतिथि संकाय डॉ. पायल तलेसरा ने गुणवत्ता मानकों (Quality Standards) और पैकेजिंग तकनीकों पर प्रकाश डाला।

इस 5 दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण से सीखकर युवा स्थानीय स्तर पर अपने छोटे खाद्य व्यवसाय (Micro Food Enterprises) शुरू करने और पारंपरिक फसलों को आधुनिक स्वरूप में बाजार तक पहुँचाने के लिए सक्षम बनेंगे।