लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भले ही कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने का ऐलान कर रहे हों, लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) को गठबंधन में शामिल करने की सुगबुगाहट ने नए सियासी समीकरण पैदा कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सपा और आम आदमी पार्टी के बीच सीटों के तालमेल को लेकर बातचीत चल रही है, जहां आप 15 से 20 सीटों का दावा ठोक रही है।
मुलाकातों से बढ़ीं सियासी अटकलें हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के बीच हुई मुलाकातों ने इन अटकलों को और बल दिया है। इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में आप ने यूपी में अपना कोई उम्मीदवार न उतारकर सपा का समर्थन किया था। वहीं, दिल्ली चुनाव के दौरान सपा ने कांग्रेस से अलग हटकर आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था।
2022 के प्रदर्शन के आधार पर आप का दावा वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 349 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा था। यद्यपि पार्टी का प्रदर्शन बहुत बड़ा नहीं रहा, लेकिन 7 विधानसभा सीटों पर उसने 5,000 से अधिक वोट हासिल किए थे:
- रुधौली: 24,367 वोट
- खलीलाबाद: 25,123 वोट
- मोहनलालगंज: 7,048 वोट
- साहिबाबाद: 6,944 वोट
- नोएडा: 6,545 वोट
- लोनी: 6,319 वोट
- दादरी: 4,613 वोट
AAP की एंट्री और सीटों की मांग का गणित
सूत्रों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों के लिए 15 से 20 सीटों की मांग कर रही है। सपा भले ही इस बैठक को औपचारिक या शिष्टाचार मुलाकात बता रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर सीटों का समीकरण इस प्रकार है:
- 2022 का प्रदर्शन: 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 349 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। यद्यपि पार्टी बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन 7 विधानसभा क्षेत्रों (जैसे रुधौली, खलीलाबाद, साहिबाबाद, नोएडा, लोनी) में उसे 5,000 से अधिक वोट मिले थे।
- रणनीतिक तालमेल: 2024 के लोकसभा चुनाव में AAP ने यूपी में अपना उम्मीदवार न उतारकर सपा को समर्थन दिया था, वहीं दिल्ली चुनावों में सपा ने भी कांग्रेस के बजाय AAP का रुख समझा था।
कांग्रेस के लिए क्यों खड़ा हो सकता है धर्मसंकट?
यदि अखिलेश यादव आम आदमी पार्टी को अपने कोटे से या अलायंस के तहत सीटें देने का फैसला करते हैं, तो कांग्रेस को इसके लिए सहमत करना आसान नहीं होगा:
- पंजाब और दिल्ली का टकराव: उत्तर प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों (जैसे पंजाब) में भी चुनावी मुकाबले होने हैं, जहां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सीधे एक-दूसरे के खिलाफ मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं।
- सीट-शेयरिंग पर दबाव: 2024 के लोकसभा प्रदर्शन के बाद कांग्रेस खुद यूपी में अपने लिए सम्मानजनक सीट-शेयरिंग की मांग कर रही है। ऐसे में AAP के जुड़ने से कांग्रेस के हिस्से में आने वाली सीटों के घटने का खतरा रहेगा।
माना जा रहा है कि आप इन्हीं मजबूत प्रभाव वाली सीटों के आधार पर अपनी दावेदारी पेश कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अखिलेश यादव अपने इस नए सियासी दांव से इंडिया अलायंस के भीतर संतुलन कैसे बनाते हैं।





