नई दिल्ली:

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र साहिल लोचब को पेलेट गन से गंभीर रूप से घायल किए जाने के मामले में आखिरकार दिल्ली पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। संसद मार्ग थाने में FIR दर्ज कराने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को करीब आठ घंटे तक पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठना पड़ा।

यह एफआईआर संसद मार्ग थाने में 'FIR No: 0085' के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 में दर्ज की गई है। हालांकि, एफआईआर में फिलहाल किसी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।

क्या हैं लागू की गई धाराएं और सजा के प्रावधान?

  • धारा 118 (खतरनाक हथियारों से गंभीर चोट पहुंचाना):
    • सामान्य चोट: 3 साल तक की जेल, ₹20,000 तक का जुर्माना, या दोनों।
    • गंभीर चोट: 1 से 10 साल तक की कैद और जुर्माना। कुछ विशेष मामलों में आजीवन कारावास का भी प्रावधान है।
  • धारा 125 (दूसरों की जान या सुरक्षा को खतरे में डालना):
    • सामान्य मामला: 3 महीने तक की जेल या ₹2,500 जुर्माना।
    • चोट लगने पर: 6 महीने तक की जेल या ₹5,000 जुर्माना।
    • गंभीर चोट लगने पर: 3 साल तक की जेल और ₹10,000 का जुर्माना।

पीड़ित साहिल लोचब की आपबीती

नजफगढ़ के रहने वाले 20 वर्षीय साहिल लोचब ने अपनी शिकायत में बताया कि वह एक दिव्यांग पिता का बड़ा बेटा है और दिल्ली पुलिस परीक्षा में धांधली व NEET पेपर लीक के खिलाफ 20 जुलाई को आयोजित छात्र प्रदर्शन में शामिल हुआ था।

"मेरे हाथ में तिरंगा था। लाठीचार्ज और आंसू गैस के दौरान जब भगदड़ मची, तब नीली पोशाक पहने एक व्यक्ति ने बंदूक से मुझ पर पेलेट चलाए। 5 से 6 बार धातु के पेलेट दागे गए। AIIMS के CT-स्कैन में सामने आया है कि मेरे शरीर (आंख, गर्दन, छाती और जबड़े) में 200 से अधिक छर्रे हैं। डॉक्टर ने कहा है कि मेरी दाहिनी आंख की रोशनी वापस आने की संभावना 1% से भी कम है।"

साहिल ने पुलिस से जंतर-मंतर और आसपास के CCTV व ड्रोन फुटेज सुरक्षित करने और मामले में मुआवजा दिए जाने की मांग की है।

इंसाफ के रास्ते में ऊपर से लगाए जा रहे थे ब्रेक: राहुल गांधी

FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह न्याय की दिशा में पहला कदम है।

उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा:

  • 8 घंटे का इंतजार: "हम सुबह 11:30 बजे से शाम पौने सात बजे तक बैठे रहे, तब जाकर एक नागरिक को FIR का अधिकार मिला।"
  • प्रशासन पर सवाल: "स्थानीय पुलिस अधिकारी FIR दर्ज करना चाहते थे, लेकिन ऊपर से निर्देश रोक रहे थे। गृह सचिव और खुद अमित शाह से बातचीत के बाद ही मंजूरी मिल सकी।"
  • देश की स्थिति: "अगर देश की राजधानी के केंद्र में FIR दर्ज कराने के लिए 8 घंटे लगते हैं, तो सोचिए छोटे शहरों या गांवों में आम जनता, महिलाओं और पीड़ितों का क्या हाल होता होगा।"