देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी महाराष्ट्र के लासलगांव में थोक प्याज की कीमतों में अचानक तेजी देखने को मिल रही है। दक्षिण भारत से खरीफ सीजन की नई प्याज की आवक में हुई देरी के कारण थोक भाव उछलकर ₹35 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए हैं। व्यापारियों के अनुसार, देर से हुई बुआई के चलते मंडियों में आवक प्रभावित हुई है, जिससे अचानक आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।

खुदरा बाजार में बढ़ी प्याज की तपिश उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में प्याज के औसत खुदरा दामों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है:

  • 21 अगस्त: ₹40.72 प्रति किलो
  • 17 अगस्त: ₹37.20 प्रति किलो
  • एक महीने पहले: ₹34.87 प्रति किलो

कृत्रिम संकट की आशंका और सरकार की तैयारी मौजूदा अगस्त के महीने में न तो कोई बड़ा त्योहार है और न ही शादियों का सीजन, जिसके चलते प्याज की मांग काफी सीमित है। इसके बावजूद दामों में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार को 'कृत्रिम संकट' (जमाखोरी और सट्टेबाजी) की आशंका है।

कीमतों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने व्यापक रणनीति बनाई है:

  1. सितंबर के पहले हफ्ते से बफर स्टॉक: जमाखोरों पर शिकंजा कसने और बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए सितंबर के पहले सप्ताह से बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने की योजना है।
  2. आपातकालीन बिक्री का विकल्प: सरकार मांग, आपूर्ति और दैनिक दरों पर बारीकी से नजर रख रही है। यदि जरूरत महसूस हुई तो सितंबर से पहले भी बफर स्टॉक को आम जनता के लिए खोला जा सकता है।
  3. पर्याप्त उत्पादन: देश में सालाना लगभग 3.10 करोड़ टन प्याज का उत्पादन होता है, इसलिए आपूर्ति की कोई वास्तविक कमी नहीं है।

सरकार के इन एहतियाती कदमों और बफर स्टॉक की बिक्री शुरू होते ही खुदरा व थोक कीमतों में जल्द ही बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।