CWC के फैसले के बाद बढ़ा सियासी पारा, बीजेपी और विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली: राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई है. विवाद की शुरुआत कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) द्वारा पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो पदों को ही गाने के फैसले के बाद हुई. जहां बीजेपी ने इसे 'राष्ट्रीय चेतना का अपमान' करार देते हुए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने का ऐलान किया है, वहीं विपक्ष ने इसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की राजनीति बताया है.

संजय राउत का तंज: बिना टेलीप्रॉम्प्टर पूरा राष्ट्रगीत गाकर दिखाएं पीएम और शाह

शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने इस विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा.

  • खुली चुनौती: राउत ने प्रधानमंत्री को मुंबई के ऐतिहासिक अगस्त क्रांति मैदान में आकर बिना टेलीप्रॉम्प्टर देखे पूरा राष्ट्रगीत गाने की चुनौती दी.
  • नेताओं की सूची: उन्होंने कहा कि पीएम के बाद अमित शाह, जय शाह और जीतन राम मांझी को भी मंच पर आकर पूरा राष्ट्रगीत गाना चाहिए.
  • मुद्दों से भटकाने का आरोप: राउत ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में महंगाई और बेरोजगारी लगातार बढ़ी है, जिससे ध्यान हटाने के लिए ऐसे विवाद खड़े किए जा रहे हैं.

बीजेपी की रणनीति: 10 बिंदुओं का प्रस्ताव और देशव्यापी अभियान

कांग्रेस के फैसले के खिलाफ बीजेपी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए 10 बिंदुओं का एक प्रस्ताव पारित किया है.

  • विरासत से समझौता नहीं: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत अन्य पार्टी नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है और तुष्टीकरण की राजनीति के लिए इसके साथ समझौता नहीं किया जा सकता.
  • विशेष अभियान: बीजेपी ने घोषणा की है कि वह राष्ट्रगीत के सभी छह पदों की गरिमा बनाए रखने और युवाओं को इसके ऐतिहासिक महत्व से जोड़ने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाएगी.

कांग्रेस का बचाव: 1937 की ऐतिहासिक परंपरा का पालन

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए बीजेपी के आरोपों को खारिज किया है.

  • ऐतिहासिक संदर्भ: कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, पार्टी 1937 में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा तय की गई ऐतिहासिक परंपरा का ही पालन कर रही है.
  • जनता से जुड़े मुद्दे ओझल: कांग्रेस सांसद नाना पटोले और शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सत्ताधारी दल अपनी विफलताओं को छिपाने और बेरोजगारी व महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए राष्ट्रगीत को सियासी औजार बना रहा है.