नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गायन को लेकर उपजा राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर पूरा राष्ट्रगीत गाने से रोकने के लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए स्थिति साफ की है।
'मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मांग रही थीं सोनिया गांधी'
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् गाने से किसी को नहीं रोका। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे काफी देर से खड़े थे, इसलिए सोनिया गांधी केवल उनके लिए कुर्सी लाने का आग्रह कर रही थीं।
जयराम रमेश ने बताया कि कार्यक्रम में नए कानून और प्रोटोकॉल के मुताबिक पूरा ‘वंदे मातरम्’ पूरे सम्मान के साथ गाया गया। भाजपा द्वारा सोशल मीडिया पर वीडियो का एक छोटा हिस्सा कट करके भ्रम फैलाया जा रहा है। वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी कहा कि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार का कोई व्यवधान नहीं हुआ था।
जानिए क्या है 'वंदे मातरम्' से जुड़ा नया कानून और नियम
इस पूरे विवाद के केंद्र में हाल ही में संसद द्वारा पारित नया कानून और गृह मंत्रालय के नए दिशानिर्देश हैं:
- कानूनी संरक्षण: संसद के इसी मानसून सत्र (जुलाई 2026) में पास हुए प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल हॉनर (अमेंडमेंट) बिल 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद, वंदे मातरम् के अपमान या गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बना दिया गया है। इसके जरिए राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी सुरक्षा दी गई है।
- सभी 6 छंद अनिवार्य: गृह मंत्रालय के नए प्रोटोकॉल के अनुसार, अब आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो छंदों के बजाय सभी 6 छंदों वाला पूरा संस्करण (लगभग 3 मिनट 10 सेकंड) गाना अनिवार्य किया गया है।
शशि थरूर ने उठाए थे व्यावहारिक सवाल
नए नियमों को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि कानून बनाकर किसी गीत के प्रति सम्मान पैदा नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे कार्यक्रमों में सभी छंदों के गायन के दौरान लोगों को लगातार खड़े रहने में व्यावहारिक परेशानियां आ सकती हैं।





