बेंगलुरु:

कर्नाटक की राजनीति में वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। चौतरफा दबाव के बीच राज्य के योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्तीफे का ऐलान करते हुए नागेंद्र अपने आंसू नहीं रोक पाए और भावुक हो गए।

नागेंद्र के इस्तीफे और आरोपों के मुख्य बिंदु

  • 'स्वेच्छा से दिया इस्तीफा': बी. नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है ताकि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के विकास कार्यों पर कोई असर न पड़े।
  • विक्टिम कार्ड का आरोप: नागेंद्र ने रोते हुए आरोप लगाया कि उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे एक आदिवासी समुदाय से आने वाले नेता हैं।
  • मुख्यमंत्री का भरोसा: उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को उनकी बेगुनाही पर पूरा विश्वास है और भाजपा ने एक निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बनाया है।

दूसरी बार मंत्री पद से इस्तीफा

बी. नागेंद्र के लिए यह दूसरा मौका है जब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है:

  1. पहला इस्तीफा (2024): कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से करीब ₹94 करोड़ के फंड डायवर्जन मामले में नाम आने पर उन्होंने तत्कालीन 'आदिवासी कल्याण मंत्री' पद से इस्तीफा दिया था।
  2. जांच और जेल: इस मामले की जांच एसआईटी, सीआईडी, सीबीआई और ईडी (ED) ने की थी। नागेंद्र करीब तीन महीने तक जेल में रहे थे और बाद में जमानत पर बाहर आए। उनका आरोप है कि दूसरी चार्जशीट में उनका नाम जानबूझकर जोड़ा गया है।

बीजेपी-जेडीएस का आक्रामक रुख और 170 KM की पदयात्रा

विपक्ष (भाजपा और जेडीएस) इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर लगातार हमलावर है:

  • 170 किलोमीटर पदयात्रा: सरकार पर दबाव बनाने के लिए विपक्ष ने 1 सितंबर से रायचूर से बल्लारी तक 170 किमी लंबी पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है।
  • फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप: बीजेपी एमएलसी एन. रवि कुमार ने आरोप लगाया कि वाल्मीकि निगम का पैसा करीब 600 बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। इस पैसे का इस्तेमाल तेलंगाना और बल्लारी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस द्वारा करने और सोने की खरीदारी में होने का दावा किया गया है।

विधानसभा सत्र भी रहा हंगामेदार

हाल ही में संपन्न हुए कर्नाटक विधानसभा के मानसून सत्र में भी इस मुद्दे को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला था। नागेंद्र ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार सूखा और KPSC जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष केवल बेबुनियाद आरोप लगाकर निर्दोष लोगों की जिंदगी खराब करने और सदन की कार्यवाही बाधित करने में लगा रहा।