नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त को घोषित "शक्ति की सप्त धारा" के तहत कृषि और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसी कड़ी में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पूसा परिसर, नई दिल्ली में दोनों मंत्रालयों के उच्च अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों, लखपति दीदियों, कृषि निर्यातकों और फूड प्रोसेसर्स के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद बैठक की।
बैठक के मुख्य बिंदु एवं रणनीतिक पहल
- 6 करोड़ लखपति दीदियों का नया लक्ष्य: योजना की अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए सरकार ने 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के प्रारंभिक आंकड़े को पार कर अब इसे 6 करोड़ तक पहुंचाने का नया लक्ष्य रखा है। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- 'शी-मार्ट्स' (She-Marts) से महिला सशक्तिकरण: ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, योग, आयुर्वेद और खाद्य उत्पादों को वैश्विक और घरेलू बाजार उपलब्ध कराने के लिए 'शी-मार्ट्स' और विशेष ब्रांडिंग पहलों को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा।
- खाद एवं ईंधन में आत्मनिर्भरता: वैश्विक संकटों के बीच किसानों को रियायती दर पर खाद की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने और कृषि आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर सहमति बनी।
- वैश्विक बाजार और निर्यात प्रोत्साहन: भारतीय कृषि और समुद्री उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों तक सीधी पहुंच बनाने और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
"शक्ति की सप्त धारा कृषि और ग्रामीण भारत का मार्गदर्शक सिद्धांत है। पारदर्शी निगरानी और जन-भागीदारी से इसे धरातल पर उतारा जाएगा।" — शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री
विकसित भारत @2047 का दृष्टिकोण
यह उच्चस्तरीय बैठक 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है। सरकार का मुख्य ध्यान केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और महिलाओं की आर्थिक स्वावलंबन के माध्यम से देश के समग्र विकास को गति देने पर केंद्रित है।





