पूसा स्थित सी. सुब्रमण्यम सभागार में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर ‘शक्ति की सप्तधारा से कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा’ संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, अधिकारियों, किसानों, लखपति दीदियों, फूड प्रोसेसर्स और FPO प्रतिनिधियों ने 'विकसित भारत-2047' के निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य अब केवल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान दिलाना है।
कार्यक्रम के प्रमुख बिंदु और भावी योजनाएं
- वैश्विक बाजार और ब्रांडिंग: भारतीय मिर्च, मसाले, फल, फूल और पारंपरिक जैविक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों, बेहतर पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जाएगा।
- लागत में कमी और AI का उपयोग: कृषि की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधुनिक मशीनरी और उन्नत बीजों को ICAR व कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) के माध्यम से सीधे खेतों तक पहुंचाया जाएगा।
- फसल विविधीकरण: बाजार की मांग का वैज्ञानिक आकलन कर किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा अन्य लाभदायक फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जाएगा।
- लखपति दीदी योजना का नया लक्ष्य: 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का प्रारंभिक लक्ष्य पूरा हो चुका है। अब प्रधानमंत्री मोदी के निर्देशानुसार 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का नया लक्ष्य रखा गया है।
- 'शी-मार्ट्स' का विस्तार: स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, आयुर्वेदिक और खाद्य उत्पादों की बिक्री के लिए 'शी-मार्ट्स' जैसी पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
अधिकारियों के लिए सफलता के 'चार सूत्र'
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को चार व्यावहारिक सूत्र दिए:
- पांव में चक्कर: दफ्तरों से बाहर निकलकर फील्ड में जाएं और जमीनी स्थिति का जायजा लें।
- मुंह में शक्कर: जनता और अपनी टीम के साथ हमेशा मधुर व्यवहार बनाए रखें।
- सीने में आग: तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने का जुनून और प्रतिबद्धता रखें।
- माथे पर बर्फ: कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में धैर्य व मानसिक संतुलन बनाए रखें।





