नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'विकसित भारत' का संकल्प कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के बिना संभव नहीं है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की 97वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को स्पष्ट संदेश दिया कि अनुसंधान का वास्तविक पैमाना केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर सही समय पर किसानों तक उसका प्रत्यक्ष और मापने योग्य लाभ पहुंचाना होना चाहिए।

बैठक में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, ICAR के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट सहित केंद्र व राज्यों के मंत्री, कृषि वैज्ञानिक और प्रमुख हितधारक उपस्थित थे। इस अवसर पर वर्ष 2025-26 की ICAR वार्षिक रिपोर्ट और महत्वपूर्ण प्रकाशन भी जारी किए गए।

बैठक के प्रमुख बिंदु और महत्वपूर्ण घोषणाएं:

  • लैब टू लैंड (प्रयोगशाला से खेत तक): कृषि मंत्री ने मांग-आधारित अनुसंधान प्रणाली पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक और नवाचारों को प्रयोगशालाओं से निकालकर जल्द से जल्द किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाए ताकि छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ सके।
  • एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System): छोटे किसानों की क्षमता मजबूत करने के लिए फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन को एकीकृत करने का आह्वान किया गया ताकि आय के बहुआयामी स्रोत बन सकें।
  • 386 नई फसल किस्मों का विकास: ICAR के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने उपलब्धियां साझा करते हुए बताया कि परिषद ने 386 नई फसल किस्में जारी की हैं, जिनमें से 94% किस्में जलवायु-प्रतिरोधी (Climate Resilient) और 29% जैव-संवर्धित (Biofortified) हैं।
  • उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: अनुसंधान के बल पर देश में खाद्यान्न उत्पादन में करीब 19 मिलियन टन की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा दूध, बागवानी और मत्स्य उत्पादन में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
  • वैश्विक बाजार पर नजर: भारत को केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित न रखकर खेत से वैश्विक बाजार तक पहचान दिलाने के लिए प्रसंस्करण, पैकेजिंग, गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ में सुधार कर निर्यात क्षमता बढ़ाने पर बल दिया गया।
  • आत्मनिर्भरता और FPO: कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने दलहन, तिलहन, बीज और प्रसंस्करण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत कर उन्हें सीधे बाजारों से जोड़ने की बात कही।