नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बड़े पैमाने पर सेंसरशिप लागू करने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने मार्च से जुलाई 2026 के बीच सोशल मीडिया कंपनियों को करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश जारी किए, जो देशवासियों के बोलने, सवाल पूछने और असहमति जताने के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

'हिमशैल का केवल एक सिरा है यह आंकड़ा'

सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर करते हुए खरगे ने सरकार की इस कार्रवाई की तुलना पेलेट गन और लाठीचार्ज से की:

  • आक्रामक दर से ब्लॉकिंग: "महज 5 महीनों में 1.95 लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर यानी औसतन हर 68 सेकंड में एक पोस्ट या अकाउंट बंद किया गया। यह तो बस हिमशैल का एक छोटा सा सिरा (Iceberg) है।"
  • युवाओं और छात्रों की आवाज दबाना: "ये आदेश अपराधियों के खिलाफ नहीं, बल्कि धांधली वाली परीक्षाओं और अपने भविष्य के लिए आवाज उठा रहे युवाओं और छात्रों के खिलाफ जारी किए गए। सड़कों पर लाठियां चलाई गईं और इंटरनेट से उनसे जुड़े पोस्ट हटाए गए।"
  • त्वरित स्वचालित कार्रवाई: खरगे ने आरोप लगाया कि पोस्ट हटाने की समयसीमा घटाकर 3 घंटे कर दी गई है और प्रक्रिया को इतना स्वचालित कर दिया गया है कि कोई इंसान आदेश पढ़ने तक की जहमत नहीं उठाता।
"सरकार की सोशल मीडिया पर यह सेंसरशिप उतनी ही निंदनीय है, जितनी कि हमारे युवाओं पर लाठीचार्ज और पेलेट गन का इस्तेमाल।" — मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष

संगठित उत्पीड़न और ट्रोलिंग का आरोप

खरगे ने सत्ताधारी दल के समर्थकों पर ऑनलाइन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और आम नागरिकों को तुरंत एफआईआर और धमकियों का सामना करना पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, महिलाओं को धमकियां देने वाले असामाजिक तत्वों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली पुलिस

दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुए बल प्रयोग के मामले में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा पेश किया है।

  • न्यूनतम बल का प्रयोग: पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया कि जवानों ने अधिकतम संयम बरता और केवल उतना ही बल प्रयोग किया जितना स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी था।
  • बैरिकेड तोड़ने का दावा: पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे और संसद की ओर बढ़ने के प्रयास में कई बैरिकेड्स तोड़ दिए थे।
  • आरोपों का खंडन: पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर 'नुकीली कीलों वाली लाठियों' के इस्तेमाल के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इसके समर्थन में पेश किया गया वीडियो एक अकेली रिकॉर्डिंग पर आधारित है।