मध्य प्रदेश के हरदा जिले में सोयाबीन की फसल पर पीला मोजेक (Yellow Mosaic) रोग का खतरा मंडराने लगा है। कृषि विज्ञान केन्द्र, हरदा के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार बंकोलिया एवं रितेश बगोरा ने टिमरनी विकासखंड के ग्राम रहटगांव, धनगांव, आलमपुर और सोडलपुर का दौरा कर सोयाबीन की फसल का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान खेतों में पीला मोजेक के साथ-साथ जीवाणु स्फोट रोग के शुरुआती लक्षण भी दर्ज किए गए हैं।

रोग के फैलाव को रोकने और फसल को नुकसान से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने किसानों को तत्काल कदम उठाने की सलाह दी है।

पीला मोजेक और कीट नियंत्रण हेतु वैज्ञानिकों की सलाह

  • संक्रमित पौधों का निपटान: खेत में रोग के लक्षण दिखते ही प्रभावित पौधों को तुरंत उखाड़कर नष्ट कर दें, ताकि बीमारी को पूरे खेत में फैलने से रोका जा सके।
  • सफेद मक्खी पर रोक: पीला मोजेक फैलाने वाली सफेद मक्खी के जैविक नियंत्रण के लिए खेतों में 'पीले स्टिकी ट्रैप' (Yellow Sticky Traps) लगाएं।
  • रासायनिक छिड़काव: वाहक कीटों और तना मक्खी के प्रभावी नियंत्रण के लिए निम्नलिखित में से किसी एक कीटनाशक का उपयोग करें:
    • थायमेथॉक्साम (12.60%) + लेम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (9.50% ZC): 50 मिली प्रति एकड़, अथवा
    • बीटा सायफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड: 140 मिली प्रति एकड़।

जीवाणु स्फोट रोग (Bacterial Blight) का उपचार

फसल निरीक्षण के दौरान सोयाबीन में जीवाणु स्फोट रोग के लक्षण भी देखे गए। इसके नियंत्रण के लिए विशेषज्ञों ने कासुगामाइसिन (5%) + कॉपर ऑक्सी क्लोराइड (45% WP) के पूर्व-मिश्रित उत्पाद का 300 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है।

रसायनों के इस्तेमाल के लिए जरूरी सावधानियां

  • मिश्रण से बचें: किसान भाई विशेष ध्यान रखें कि कीटनाशक, फफूंदनाशक (Fungicide) और जीवाणुनाशक को आपस में मिलाकर एक साथ छिड़काव बिल्कुल न करें।
  • मात्रा का ध्यान: प्रत्येक रसायन का प्रयोग उसके डिब्बे पर दिए गए लेबल और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही करें।
  • विशेष परामर्श: कृषि विज्ञान केंद्र की प्रमुख डॉ. संध्या मुरे ने सलाह दी है कि किसी भी प्रकार की दवा का छिड़काव करने से पहले केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क करें या व्हाट्सएप/वीडियो कॉल के माध्यम से प्रभावित फसल की फोटो भेजकर सटीक परामर्श प्राप्त करें।