मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित 'नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग' के तहत जिले में 10 बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए आवश्यक जैव-इनपुट स्थानीय स्तर पर ही आसानी से उपलब्ध कराना है।
उप संचालक कृषि, शिव सिंह राजपूत के अनुसार जिले में कुल 15 प्राकृतिक खेती क्लस्टर गठित किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक दो क्लस्टर पर एक बीआरसी स्थापित किया जाएगा।
विकासखंडवार केंद्रों की योजना
जिले के विभिन्न विकासखंडों में बीआरसी की स्थापना निम्नानुसार की जाएगी:
- खरगोन विकासखंड: 02 केंद्र
- सेंगाव, गोगावां, भीकनगांव, भगवानपुरा, झिरन्या, कसरावद, महेश्वर एवं बड़वाह: 01-01 केंद्र
इन केंद्रों के संचालन से स्थानीय किसानों को प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाली जैविक सामग्री सही समय पर और निकटतम स्थान पर प्राप्त हो सकेगी।
आवेदन प्रक्रिया एवं पात्रता
बीआरसी की स्थापना के लिए स्थानीय कृषि उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों और प्राथमिक सेवा सहकारी समितियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
- आवेदन की अंतिम तिथि: 10 सितंबर 2026 (सायंकाल 06:00 बजे तक)
- आवेदन जमा करने का स्थान: संबंधित विकासखंड तकनीकी प्रबंधक (बीटीएम) या परियोजना संचालक (आत्मा) कार्यालय।
यदि किसी क्लस्टर में पात्र संस्थाएं उपलब्ध नहीं होती हैं, तो वहां प्राकृतिक खेती से जुड़े स्थानीय कृषि उद्यमियों का चयन किया जाएगा।
आवश्यक दस्तावेज एवं व्यावसायिक शर्तें
आवेदकों को आवेदन पत्र के साथ निम्नलिखित दस्तावेज एवं विवरण संलग्न करना अनिवार्य होगा:
- संस्था का पंजीयन प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड एवं पैन कार्ड
- सदस्यों की अधिकृत सूची
- 2-वर्षीय व्यवसाय योजना: इसमें केंद्र का प्रस्तावित स्थान, क्षेत्रीय कृषि स्थिति, बाजार विश्लेषण, विपणन रणनीति, जैव-इनपुट उत्पादन व विक्रय योजना तथा कच्चे माल की सोर्सिंग की जानकारी शामिल होनी चाहिए।
कच्चे माल एवं संसाधनों की अनिवार्यता
बीआरसी संचालन के लिए पशुधन या पौधों पर आधारित बायोमास की पर्याप्त उपलब्धता होना आवश्यक है।
- गोबर एवं गौमूत्र प्रबंधन: यदि आवेदक के पास स्वयं की व्यवस्था नहीं है, तो केंद्र के 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित गौशालाओं से अनुबंध या उपलब्धता का विवरण देना होगा।
- सामुदायिक सहयोग: स्वयं सहायता समूह, एफपीओ, प्राथमिक सेवा सहकारी समिति, गौशाला, ग्राम पंचायत या अन्य सामुदायिक संस्थाओं से प्राप्त सहयोग का ब्योरा देना होगा।
खरगोन जिले में इन 10 बीआरसी की स्थापना से न केवल किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले जैविक इनपुट सुलभ होंगे, बल्कि यह कदम रसायन-मुक्त और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।





