तेहरान: वैश्विक राजनीति और अमेरिका के साथ संभावित सैन्य टकराव के बीच ईरान ने एक अहम कूटनीतिक फैसला लिया है। ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से चार चुनिंदा देशों— भारत, चीन, इराक और कतर— के जहाजों को गुजरने की पूरी छूट देने का ऐलान किया है।

ईरानी संसद के उपाध्यक्ष ने की घोषणा

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मोगद्दम ने मंगलवार को आर्थिक और सुरक्षा हालातों की समीक्षा बैठक के बाद इस निर्णय की जानकारी दी।

  • उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से इन चारों देशों के जहाजों को इस समुद्री रास्ते से बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई है।
  • हयात-मोगद्दम के मुताबिक, अमेरिकी पक्ष को भी इन देशों के जहाजों की आवाजाही से किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है।

इन देशों को छूट दिए जाने के पीछे क्या हैं मुख्य वजहें?

ईरान द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे देश की आर्थिक, कूटनीतिक और चिकित्सीय जरूरतें जुड़ी हुई हैं:

  1. भारत को छूट (चिकित्सीय आवश्यकता): ईरान ने भारत को यह छूट मुख्य रूप से दवाइयों और चिकित्सीय उपकरणों के आयात को सुगम बनाने के लिए दी है, जिससे तेहरान को आवश्यक मेडिकल सप्लाई मिलती रहे।
  2. चीन को छूट (राजनीतिक और आर्थिक समर्थन): चीन को यह विशेष छूट उसके साथ कूटनीतिक एवं राजनीतिक समर्थन हासिल करने तथा द्विपक्षीय व्यापार से मिलने वाले आर्थिक फायदों को ध्यान में रखकर दी गई है।

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अमेरिका के साथ संभावित टकराव और कतर की मध्यस्थता

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका के साथ ईरान के सैन्य टकराव की आशंकाओं को लेकर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।

  • ईरान के आंतरिक राजनीतिक प्रयास: ईरान के शीर्ष राजनीतिक नेता (जिनमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं) सैन्य नेतृत्व पर कूटनीतिक रास्ते अपनाने और संघर्ष टालने का दबाव बना रहे हैं। वे कतर की मध्यस्थता से आए शांति प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
  • कतर के दूत तेहरान में: 'अल अरबिया' की रिपोर्ट के अनुसार, कतर के प्रतिनिधि हाल ही में तेहरान पहुंचे थे, जिनका मुख्य उद्देश्य अमेरिका के साथ जारी संघर्ष को रोकने के लिए आए इस प्रस्तावित समझौते पर ईरान का अंतिम आधिकारिक रुख जानना था।
  • सैन्य नेतृत्व की आशंकाएं: हालांकि राजनीतिक नेता बातचीत के जरिए तनाव कम करना चाहते हैं, लेकिन ईरान का सैन्य रणनीतिकार वर्ग अमेरिकी सेना के साथ किसी भी संभावित सैन्य संघर्ष को लेकर अभी भी सतर्क और आशंकित बना हुआ है।

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