भारत की स्टार महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की झोली में दुनिया के लगभग हर बड़े खेल आयोजन का मेडल है, सिवाय एशियन गेम्स (Asian Games) के। एशियाई खेलों में पदकों के इस सूखे को खत्म करने के लिए 32 वर्षीय मीराबाई ने अपना इरादा मजबूत कर लिया है। उन्होंने कसम खाई है कि जब तक वे एशियन गेम्स में मेडल नहीं जीत लेंगी, तब तक अपने घर मणिपुर वापस नहीं लौटेंगी।
घर जाने के बजाय मोदीनगर में शुरू की कड़ी ट्रेनिंग
ग्लास्गो में लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीराबाई ने जश्न मनाने या घर जाकर आराम करने के बजाय सीधे मोदीनगर का रुख किया। जापान के आची-नागोया (Aichi-Nagoya) में 19 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स के लिए उन्होंने दिन-रात पसीना बहाना शुरू कर दिया है।
कोच और डॉक्टर ही बना नया परिवार
फिलहाल मीराबाई ने अपने परिवार से दूरी बनाई हुई है और उनके लिए उनके मुख्य कोच विजय शर्मा तथा अमेरिका के स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग कोच डॉ. आरोन ही परिवार का हिस्सा हैं।
- डिजिटल कोचिंग: डॉ. आरोन खुद भी पूर्व वेटलिफ्टर रह चुके हैं। वे हर गुरुवार को वीडियो कॉल के जरिए मीराबाई की ट्रेनिंग की समीक्षा करते हैं और उन्हें तकनीकी सलाह देते हैं।
पुराने जख्मों को भरने का मौका
एशियन गेम्स में मीराबाई का सफर अब तक चुनौतियों से भरा रहा है:
- 2018 जकार्ता एशियन गेम्स: पीठ की गंभीर चोट (Back Injury) के कारण वे प्रतियोगिता से बाहर हो गई थीं।
- 2023 एशियन गेम्स: वे बेहद करीबी मुकाबले में चौथे स्थान पर रहकर मेडल से चूक गई थीं।
अब मीराबाई चानू कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहतीं और उनका पूरा ध्यान केवल और केवल एशियन गेम्स के पोडियम पर तिरंगा फहराने पर टिका है।





