हर सफलता के पीछे एक गहरा संघर्ष छिपा होता है। राजस्थान के उदयपुर शहर के रहने वाले चंद्रजीत सिंह राजावत के लिए शतरंज में एक मुकाम तक पहुंचने का सफर चुनौतियों से भरा रहा। उन्होंने न केवल राजस्थान का पहला एरिना ग्रैंडमास्टर (AGM) बनने का गौरव हासिल किया, बल्कि आज उनकी एकेडमी दुनिया के लगभग 30 देशों में शतरंज के नए सितारे तैयार कर रही है।

'यह बच्चों का खेल नहीं...' और मिली प्रेरणा

चंद्रजीत सिंह की शतरंज में दिलचस्पी उस समय शुरू हुई जब वे IIT की तैयारी कर रहे थे। निंटेंडो के मारियो गेम में उन्हें शतरंज दिखा, जिसमें उनके पिता की पहले से रुचि थी। जब 16 वर्षीय चंद्रजीत ने खेल में अपनी इच्छा जताई, तो पिता ने कहा, "ये बच्चों का खेल नहीं, तुम समझ नहीं पाओगे।"

पिता के इस जवाब ने उनके दिल में ऐसी आग लगाई कि उन्होंने खुद से खेल सीखा और अगले ही दिन अपने पिता को मात दे दी।

शतरंज का जुनून: IIT छोड़ा और त्याग दिया घर

शतरंज से पहले चंद्रजीत को क्रिकेट का शौक था, लेकिन भारी प्रतिस्पर्धा के कारण उन्होंने इसे छोड़ दिया था।

  • IIT क्रैक किया, लेकिन रास्ता बदला: उन्होंने IIT प्रवेश परीक्षा पास की और अच्छी रैंक भी हासिल की। हालांकि, शतरंज के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने काउंसलिंग फॉर्म भरने से इनकार कर दिया।
  • घर से दूरी: मिडिल क्लास परिवार और आर्थिक तंगी के बीच जब इस फैसले को लेकर घर में विवाद बढ़ा, तो चंद्रजीत घर छोड़कर दिल्ली चले आए।

दिल्ली का संघर्ष: कम बजट और सड़कों पर गुजरी रातें

दिल्ली में शुरुआती दौर बेहद कठिन रहा:

  • आर्थिक तंगी: साल 2014 में उन्होंने दिल्ली में ₹3,500 की फीस वाले टूर्नामेंट में भाग लिया। पैसों की कमी के कारण उनके पास सही से खाने तक के पैसे नहीं होते थे।
  • सड़क ही बनी बिस्तर: कई बार टूर्नामेंट के दौरान रहने की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें खुले में सड़क पर ही सोना पड़ा। लेकिन इन विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

राजस्थान के पहले AGM और 'किंगडम ऑफ चेस' की शुरुआत

  • इतिहास रचा: दिल्ली में अनुभवी खिलाड़ियों और ग्रैंडमास्टर्स को हराने के बाद उनका हौसला बढ़ा। वे राजस्थान के पहले एरिना ग्रैंडमास्टर (AGM) बने। अपने करियर में उन्होंने डी. गुकेश, प्रज्ञानानंदा और निहाल सरीन जैसे दिग्गज खिलाड़ियों से भी मुकाबला किया।
  • अकैडमी की स्थापना: साल 2019 में वे उदयपुर लौटे और 'किंगडम ऑफ चेस' (Kingdom of Chess) अकैडमी की शुरुआत की।

आज उनकी अकैडमी 30 से अधिक देशों में सक्रिय है। उनके सिखाए 100 से अधिक छात्र स्टेट, नेशनल, कॉमनवेल्थ, एशियाई स्वर्ण और विश्व चैंपियनशिप में पदक जीत चुके हैं।